Shimla: हिमाचल निर्माता की नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री

Edited By Kuldeep, Updated: 04 Aug, 2026 07:26 PM

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प्रदेश सरकार राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह की नीतियों को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उनकी दूरदर्शी सोच व दृष्टिकोण से योजनाएं व कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं।

शिमला (ब्यूरो): प्रदेश सरकार राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह की नीतियों को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उनकी दूरदर्शी सोच व दृष्टिकोण से योजनाएं व कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हिमाचल निर्माता डा. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती के अवसर पर विधानसभा परिसर शिमला में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए अपने संबोधन में यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी नीतियों को धरातल पर उतारना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने रिज मैदान स्थित डा. परमार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान कई अन्य नेता भी मौजूद रहे। वहीं विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डा. परमार ने हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए बहुआयामी प्रयास किए। हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व का दर्जा दिलाने के लिए डा. परमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डा. परमार ने एक आधुनिक हिमाचल का सपना देखा था, जिसमें सभी लोग शिक्षित व साधन-संपन्न हों और उन्हें आवागमन की बेहतर सुविधा मिले।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया है। वर्तमान सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप 99.30 साक्षरता दर के साथ हिमाचल प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य बना है, जो बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए डा. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना के अंतर्गत मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपए तक के शिक्षा ऋण की व्यवस्था की है।

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के विकास और इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर प्रदेश हित में कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हक हासिल करने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के अधिकारों को प्राप्त करने की सोच के साथ संघर्ष कर रही है और विपक्ष को भी इस दिशा में अपना दायित्व निभाना चाहिए। प्रदेश सरकार डा. परमार की सोच को फलीभूत करने का प्रयास कर रही है।

इसी दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2032 तक हिमाचल देश का एक समृद्धशाली राज्य बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, संपर्क व अन्य सुविधाओं का विकास कर गांव की तकदीर व तस्वीर बदलने के सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक गण, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. राधा रमण शास्त्री व गंगू राम मुसाफिर, पूर्व विधायकगण, शिमला के महापौर, उपमहापौर, जिलाधीश व एसपी शिमला, बोर्ड एवं निगमों के चेयरमैन, सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव राजीव कुमार तथा विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा एवं विधानसभा सचिवालय के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल थे।

छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन, पौधारोपण भी किया
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डा. परमार के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक अध्यक्षपीठ से प्रेक्षण एवं विनिर्णय तथा अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर विधानसभा परिसर में पौधारोपण भी किया।

हिमाचल के वास्तविक शिल्पकार थे डा. परमार : पठानिया
हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने संबोधन में कहा कि 18 वर्ष 8 महीने 16 दिनों तक मुख्यमंत्री रहे डा. यशवंत सिंह परमार प्रदेश के वास्तविक शिल्पकार थे। उन्होंने कहा कि 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल का निर्माण, 1 नवम्बर 1966 को पंजाब के पहाड़ी इलाकों का हिमाचल में विलय कर विशाल हिमाचल का गठन तथा 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश को भारतीय गणराज्य का 18वां राज्य बनाने में उनकी अहम भूमिका अतुलनीय तथा अविस्मरणीय रहेगी। पठानिया ने कहा कि उनकी भूमिका हिमाचल तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह स्वतंत्रता संग्राम के भी जाने-माने नायक थे। वह 1949 से 1952 तक संविधान सभा के भी सदस्य रहे, जो इस बात का परिचायक है कि उनकी योग्यता तथा क्षमता राष्ट्रीय स्तर की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना सारा जीवन हिमाचल के लिए समर्पित किया था।

सम्मान में कार्यक्रम भी बड़े होने चाहिए : जयराम ठाकुर
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर हिमाचल निर्माता यशवंत सिंह परमार की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि डा. परमार का योगदान बहुत बड़ा है, इसलिए सम्मान में कार्यक्रम भी बड़े होने चाहिए। पूर्व सरकार ने दलगल राजनीति से ऊपर उठकर उनकी जयंती का आयोजन राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में किया था। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने पहाड़ जैसी चुनौतियों को पार करते हुए आज यह मुकाम हासिल किया है। हिमाचल के गठन से लेकर पूर्ण राज्य बनने और विकास की गाथा लिखने में सबसे अहम भूमिका हिमाचल निर्माता यशवंत सिंह परमार की थी। उन्होंने जो सपने देखे, उनके द्वारा बनाई गई नीतियां और योजनाएं हिमाचल के विकास में मील का पत्थर साबित हुईं।

उसी मार्ग पर आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी : डा. बिंदल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने भी राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार की जयंती के अवसर पर रिज मैदान स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डा. परमार केवल हिमाचल प्रदेश के निर्माता ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, विकास की दूरदर्शी सोच और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक थे। कृषि, बागवानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसे मूलभूत विषयों पर उनका दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सड़कें हमारी भाग्य रेखा हैं, जैसी सोच डा. परमार की विकास दृष्टि को दर्शाती है और प्रदेश को उसी मार्ग पर आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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