Edited By Swati Sharma, Updated: 02 Jun, 2026 10:48 AM

Kangra Valley Railway : पर्यटन, सम्पर्क और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर रेलवे दो जून यानी आज से ऐतिहासिक पठानकोट-बैजनाथ पपरोला-जोगिंदरनगर नैरो-गेज खंड पर पूर्ण यात्री ट्रेन सेवाओं को बहाल करने जा रहा है और इसके साथ ही लगभग चार...
Kangra Valley Railway : पर्यटन, सम्पर्क और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर रेलवे दो जून यानी आज से ऐतिहासिक पठानकोट-बैजनाथ पपरोला-जोगिंदरनगर नैरो-गेज खंड पर पूर्ण यात्री ट्रेन सेवाओं को बहाल करने जा रहा है और इसके साथ ही लगभग चार साल के अंतराल के बाद प्रतिष्ठित कांगड़ा घाटी रेलवे के माध्यम से पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश फिर से जुड़ जाएंगे।
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उत्तर रेलवे जम्मू मंडल के जनसम्पर्क अधिकारी (पीआरओ) राघविंदर ने बताया कि इस मार्ग पर ट्रेन सेवाएं अगस्त 2022 से निलंबित थीं। यह निलंबन भारी बाढ़ और कथित अवैध खनन गतिविधियों के कारण चक्की नदी पर बने ब्रिटिश-युग के एक रेलवे पुल के ढह जाने के बाद हुआ था। उन्होंने बताया कि इस व्यवधान के कारण पठानकोट से रेल संपर्क लगभग 1,385 दिनों तक बाधित रही। उन्होंने कहा कि सेवाओं की बहाली, रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा ट्रैक के सफल परीक्षण और सुरक्षा मंजूरी के बाद की जा रही है, जिससे नियमित यात्री परिचालन की फिर से शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह कांगड़ा रेलवे स्टेशन से ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी। इस अवसर पर कांगड़ा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर उपस्थित रहेंगे, जबकि कांगड़ा के विधायक पवन काजल भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। उत्तर रेलवे के अनुसार, ट्रेन संख्या 52465 पठानकोट से सुबह 5:00 बजे रवाना होगी और अपराह्न 12:00 बजे बैजनाथ पपरोला पहुंचेगी, जबकि ट्रेन संख्या 52467 सुबह 7:00 बजे रवाना होगी और अपराह्न 1:40 बजे पहुंचेगी। वापसी की दिशा में ट्रेन संख्या 52470 बैजनाथ पपरोला से अपराह्न 2:15 बजे रवाना होगी और रात 9:45 बजे पठानकोट पहुंचेगी, जबकि ट्रेन संख्या 52474 अपराह्न 3:40 बजे रवाना होगी और रात 10:50 बजे पहुंचेगी।
राघविंदर ने बताया कि यह मार्ग डलहौजी रोड, नूरपुर रोड, ज्वालामुखी रोड, कांगड़ा, पालमपुर हिमाचल और पंचरुखी जैसे प्रमुख स्टेशनों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में मानसून की बारिश और भूस्खलन के कारण इस रेल लाइन को भी भारी नुकसान पहुंचा था। ब्रिटिश काल में निर्मित 164 किलोमीटर लंबी कांगड़ा घाटी रेलवे, एक सदी से भी अधिक पुरानी है और संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में शामिल है। घाटियों, चाय के बागानों और ऐतिहासिक मेहराबदार पुलों से होकर गुजरने वाली अपनी मनोरम यात्रा के लिए प्रसिद्ध यह मार्ग, भारत की सबसे खूबसूरत रेल लाइनों में से एक माना जाता है और यह अपनी इस खासियत के लिए अद्वितीय है कि इस पर एक भी सुरंग नहीं है। सेवाओं की बहाली से कांगड़ा घाटी, धर्मशाला और पालमपुर में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह स्थानीय निवासियों, दैनिक यात्रियों और छोटे व्यापारियों के लिए परिवहन का एक किफायती साधन भी उपलब्ध कराएगा। यह भी उम्मीद है कि लंबे समय तक सेवा निलंबित रहने से प्रभावित चाय बागानों के विक्रेताओं, होमस्टे संचालकों और पर्यटक गाइडों के लिए आर्थिक गतिविधियां फिर से शुरू हो सकेंगी। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले एनटीईएस एप्लिकेशन के माध्यम से बुकिंग विवरण और ट्रेन की लाइव स्थिति की जांच कर लें।
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