Edited By Vijay, Updated: 06 Aug, 2026 09:25 PM

संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे और बिना चर्चा के कार्यवाही स्थगित होने पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार का दर्द और गुस्सा छलक उठा है।
जालंधर/पालमपुर (राहुल): संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे और बिना चर्चा के कार्यवाही स्थगित होने पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार का दर्द और गुस्सा छलक उठा है। शांता कुमार ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसे प्राप्त करने के लिए हजारों देशभक्तों ने बलिदान दिए थे। देशभक्तों के बलिदान से प्राप्त लोकतंत्र अब कमजोर होता दिखाई दे रहा है। संसद में चर्चा बहुत कम और हंगामा बहुत अधिक हो रहा है। कई बार संसद का पूरा सत्र बिना चर्चा के ही बीत जाता है। कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के ही पारित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि गुलाम भारत की राजनीति देश के लिए थी। भगत सिंह जैसे अनेक देशभक्त हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे, लेकिन आजाद भारत की राजनीति केवल कुर्सी और स्वार्थ के लिए होती जा रही है।
शांता कुमार ने कहा कि संसद पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। जब संसद में कोई काम नहीं होता, केवल नारेबाजी, शोर-शराबा और हंगामा होता है, तब भी सांसद लाखों-करोड़ों रुपए वेतन और भत्तों के रूप में लेते हैं। संसद चर्चा के लिए है और वेतन एवं भत्ते काम करने के लिए हैं। उन्होंने मांग की कि संसद में "काम नहीं तो वेतन नहीं" का सिद्धांत लागू किया जाए। जिन सांसदों के कारण काम नहीं होता और हंगामा होता है, उन्हें उस अवधि का वेतन और भत्ता नहीं मिलना चाहिए।
शांता कुमार ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद केवल दो अवसरों पर शांत रहती है। किसी बड़े नेता के निधन पर शोक प्रस्ताव के समय कोई शोर नहीं होता। कभी-कभी जब सभी सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने का विधेयक आता है, तब भी संसद शांत रहती है। इन दो अवसरों को छोड़कर लोकसभा अधिकांश समय "शोर सभा" बन जाती है। शांता कुमार ने देश के सभी नेताओं से लोकतंत्र के इस बढ़ते अवमूल्यन को रोकने की अपील की है।
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