Kangra: कांग्रेस प्रवक्ता पुनीत मल्ली का पलटवार, बोले-कर्ज की दुहाई देने से पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दे भाजपा

Edited By Vijay, Updated: 25 Sep, 2026 10:12 PM

state congress spokesperson puneet malli

मुख्यमंत्री के नए कार्यालय और प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्षी भाजपा नेताओं के लगातार हमलों पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता पुनीत मल्ली ने पलटवार किया है।

धर्मशाला (ब्यूरो): मुख्यमंत्री के नए कार्यालय और प्रदेश के बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्षी भाजपा नेताओं के लगातार हमलों पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता पुनीत मल्ली ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को कर्ज पर सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल में प्रदेश की वित्तीय स्थिति और लिए गए कर्ज का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठाने वाली भाजपा यह भी बताए कि सत्ता में रहते हुए उसने सरकारी भवनों और संस्थागत ढांचे पर कितना खर्च किया।

नया मुख्यमंत्री कार्यालय किसी व्यक्ति का नहीं, प्रदेश की संपत्ति
पुनीत मल्ली ने कहा कि नया मुख्यमंत्री कार्यालय किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि हिमाचल सरकार की स्थायी संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में जो भी मुख्यमंत्री होगा, वह इसी कार्यालय से काम करेगा। नए कार्यालय की लागत करीब 20 करोड़ रुपए बताई गई है और इसमें मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कार्यालय तथा आगंतुकों के लिए स्थान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों से कांग्रेस सरकार न तो भाग रही है और न ही उन्हें छिपा रही है। मल्ली ने कहा कि भाजपा को राजनीतिक बयानबाजी की बजाय यह भी बताना चाहिए कि उसके कार्यकाल में प्रदेश पर कितना कर्ज बढ़ा और उपलब्ध केंद्रीय सहायता का इस्तेमाल किस तरह किया गया। मल्ली ने कहा कि कांग्रेस सरकार वित्तीय दबाव के बावजूद राजस्व बढ़ाने और खर्च को नियंत्रित करने की दिशा में काम कर रही है।

कार्यालय पर राजनीति, आंकड़ों पर चुप्पी क्यों?
पुनीत मल्ली ने कहा कि भाजपा नए कार्यालय की लागत को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा करते समय पूरे वित्तीय इतिहास को सामने रखना चाहिए। केवल एक भवन की लागत को प्रदेश के कर्ज से जोड़कर राजनीतिक माहौल बनाना तथ्यों की पूरी तस्वीर नहीं है। कांग्रेस सरकार को विरासत में मिलीं वित्तीय देनदारियों और मौजूदा आर्थिक दबावों के बीच कर्मचारियों, पैंशनरों और विकास कार्यों की जरूरतों को संतुलित करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा यदि वित्तीय स्थिति पर गंभीर चर्चा चाहती है तो सरकार आंकड़ों के आधार पर जवाब देने को तैयार है।

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