Edited By Vijay, Updated: 24 Sep, 2026 09:20 PM

ज्वालामुखी अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ने और टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो जाने से मामला गरमा गया। महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद परिजन ज्वालामुखी अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष जताते हुए...
ज्वालामुखी (नितेश): ज्वालामुखी अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ने और टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो जाने से मामला गरमा गया। महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद परिजन ज्वालामुखी अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष जताते हुए नारेबाजी की। परिजनों ने उपचार में लापरवाही की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।मृतका की पहचान त्रिकला देवी पत्नी दीपक डोगरा निवासी तरीड़ी (मझीन) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार महिला को बुधवार सुबह करीब 5 बजे ज्वालामुखी अस्पताल लाया गया था। दोपहर बाद करीब साढ़े 3 बजे उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद महिला को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया, लेकिन करीब एक घंटे बाद अचानक उसे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। हालत बिगड़ने पर उसे टांडा मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने रैफर करने में देरी पर उठाए सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रसव के बाद रक्तस्राव जारी रहने के बावजूद उपचार और रेफर करने की प्रक्रिया में देरी हुई। उनका कहना है कि यदि महिला की स्थिति गंभीर थी और ज्वालामुखी अस्पताल में उसका उपचार संभव नहीं था तो उसे समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए भेजा जाना चाहिए था। परिजनों का आरोप है कि काफी रक्तस्राव होने के बाद महिला को टांडा रेफर किया गया।हालांकि, रक्तस्राव की वास्तविक मात्रा, रैफरल का सटीक समय और उपचार के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि चिकित्सा रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही हो सकेगी।
बीएमओ बोले, अचानक हुआ पोस्टपार्टम हैमरेज
ज्वालामुखी अस्पताल के बीएमओ डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि महिला की डिलीवरी अस्पताल में शाम करीब साढ़े 3 बजे हुई थी। इसके बाद उसे निगरानी में रखा गया था। करीब एक घंटे बाद अचानक महिला को काफी अधिक ब्लीडिंग शुरू हो गई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पोस्टपार्टम हैमरेज कहा जाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने महिला की स्थिति को संभालने और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के प्रयास किए। इसके बाद महिला को उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए शिफ्ट किया गया। बाद में टांडा में उपचार के दौरान उसकी मौत होने की जानकारी मिली। डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि महिला के परिजन अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने मामले की जांच की मांग की है। परिजनों से लिखित शिकायत भी ली गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
डिलीवरी के बाद कैसे बिगड़ी हालत, होगी पूरी जांच
बीएमओ ने कहा कि मामले की पूरी जांच करवाई जाएगी। डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत क्यों बिगड़ी, रक्तस्राव किस स्थिति में शुरू हुआ, अस्पताल में क्या उपचार दिया गया और उसे किन परिस्थितियों में उच्च संस्थान के लिए रैफर किया गया, इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रसव के बाद किसी मरीज को सीधे रैफर नहीं किया जाता। यदि मरीज की तबीयत बिगड़ती है तो पहले अस्पताल में आवश्यक उपचार देकर उसकी स्थिति को स्थिर करने का प्रयास किया जाता है। इस मामले में भी महिला की हालत बिगड़ने के बाद स्टाफ ने उसे संभालने का प्रयास किया और इसके बाद उसे उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए शिफ्ट किया गया।
2 साल पहले हुई थी शादी, परिवार में पसरा मातम
त्रिकला देवी की शादी करीब 2 वर्ष पहले दीपक डोगरा के साथ हुई थी। परिजनों के अनुसार दीपक दिहाड़ी मजदूरी करता है और परिवार का बड़ा बेटा है। महिला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद उसकी मां की मौत से परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में न्याय चाहिए। फिलहाल महिला की मौत के वास्तविक कारण और उपचार में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। उधर, पुलिस जिला देहरा के एसपी संदीप धवल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
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