Edited By Kuldeep, Updated: 04 Aug, 2026 05:26 PM

27 जुलाई की सुबह जब कृष शर्मा और साक्षिव शर्मा रोज की तरह घर से बलाहर संस्कृत कॉलेज के लिए निकले, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह विदाई इतनी लंबी हो जाएगी।
बनखंडी (राजीव शर्मा): 27 जुलाई की सुबह जब कृष शर्मा और साक्षिव शर्मा रोज की तरह घर से बलाहर संस्कृत कॉलेज के लिए निकले, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह विदाई इतनी लंबी हो जाएगी। परिवार ने शाम को उनके लौटने की उम्मीद में दरवाजे खुले रखे, लेकिन रात होने तक दोनों घर नहीं पहुंचे। देखते ही देखते एक दिन 9 दिनों में बदल गया, लेकिन दोनों छात्रों का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया। दोनों परिवारों की आंखें आज भी दरवाजे पर टिकी हैं और हर आहट पर उन्हें अपने बेटों के लौट आने की उम्मीद बंध जाती है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, बलाहर के 17 वर्षीय छात्र कृष शर्मा और साक्षिव शर्मा के लापता होने के 9 दिन बाद भी उनका कोई सुराग नहीं लग पाया है।
दोनों परिवारों के लिए हर गुजरता दिन चिंता और बेचैनी बढ़ा रहा है। घरों में मातम जैसा माहौल है। उधर, पुलिस, प्रशासन तथा एसडीआरएफ की टीमें नौवें दिन भी दिन-रात दोनों किशोरों की तलाश में जुटी हुई हैं। हालांकि, दोनों बच्चों के परिजनों ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि पुलिस, प्रशासन तथा एसडीआरएफ की टीमें अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रही हैं और दिन-रात बच्चों की तलाश में जुटी हुई हैं। परिजनों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही उनके बच्चों का सुराग मिलेगा और वे सकुशल घर लौटेंगे। उनकी एक ही प्रार्थना है कि उनके बच्चे सकुशल घर लौट आएं।
अब तक तलाशी अभियान
गौरतलब है कि 27 जुलाई को दोनों किशोर घर से कॉलेज के लिए निकले थे, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटे। जब परिजनों ने उनकी तलाश की तो दोनों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिले। इसके बाद कृष शर्मा के पिता रमन कुमार ने थाना देहरा में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरूआती दिनों में पुलिस ने वेद व्यास परिसर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। एसडीआरएफ की विशेष टीम, ड्रोन कैमरों और ट्रैकर डॉग स्क्वॉड की मदद से व्यास नदी और आसपास के संभावित क्षेत्रों में लगातार सर्च ऑप्रेशन चलाया जा रहा है, लेकिन अब तक दोनों किशोरों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
छात्रों की पारिवारिक स्थिति
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार साक्षिव के पिता राजेश कुमार होशियारपुर में सरकारी नौकरी करते हैं और ड्यूटी के कारण सप्ताह में केवल छुट्टी मिलने पर ही घर आ पाते हैं। करीब दो वर्ष पहले साक्षिव की माता का निधन हो चुका है। उसका एक छोटा भाई अपने मामा के घर रहकर 10वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। घर में साक्षिव अपनी दादी युध्या देवी के साथ रहता था। दादी युध्या देवी ने बताया कि साक्षिव ने अभी 4 दिन पहले ही कॉलेज जाना शुरू किया था और 5वें दिन वह लापता हो गया। इसके बाद से पुलिस और परिवार लगातार उसकी तलाश में जुटा है, लेकिन अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
2 बजे परिजनों से बात हुई और 3 बजे फोन स्विच आफ
वहीं कृष शर्मा के पिता रमन कुमार मध्यवर्गीय परिवार से हैं और रसोइए का कार्य करते हैं। उसकी माता गृहिणी हैं, जबकि उसकी एक छोटी बहन नौवीं कक्षा में पढ़ती है। परिजनों के अनुसार, जिस दिन दोनों बच्चे लापता हुए, उस दिन दोपहर करीब 2 बजे कृष की अपनी माता से फोन पर बात हुई थी। उसने बताया था कि उसके पीरियड नहीं लग रहे हैं, इसलिए वह घर लौट रहा है। लेकिन करीब 3 बजे जब दोबारा फोन किया गया तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ आया। इसके बाद से दोनों बच्चों का कोई पता नहीं चल पाया।
3 दिन तक लिफ्ट देता रहा एक कारण चालक
दोनों परिवारों के परिजनों के अनुसार, लापता होने से लगभग 3 दिन पहले तक एक अनजान कार चालक दोनों बच्चों को सुनहेत से बनखंडी तक लगातार लिफ्ट देकर छोड़ता था। बच्चों ने घर पर भी बताया था कि एक व्यक्ति रोज उन्हें लिफ्ट देता है, लेकिन वे उसे नहीं जानते थे। परिजनों का कहना है कि वह चालक बच्चों को उनके बस स्टॉप सीरा दा भरो तक छोड़ने की बजाय दो से तीन किलोमीटर पहले ही उतार देता था। चौथे दिन दोनों बच्चे अचानक लापता हो गए। इसी वजह से परिजन अब इस पूरे घटनाक्रम को संदेह की नजर से देख रहे हैं। परिजनों के अनुसार, दोनों बच्चे सीरा दा भरो गांव से प्रतिदिन सुबह करीब आठ बजे कॉलेज के लिए निकलते थे और सामान्यतः शाम करीब पांच बजे तक घर लौट आते थे। लेकिन 27 जुलाई से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।