Una: कांग्रेस के अपने नेता ही खोल रहे सरकार की पोल, मुख्यमंत्री की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही : राजेन्द्र राणा

Edited By Kuldeep, Updated: 17 Jun, 2026 11:17 PM

una chief minister rajendra rana

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र राणा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आज कांग्रेस के अपने नेता व कार्यकर्त्ता ही सरकार की पोल खोल रहे हैं।

ऊना (मनोहर): भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र राणा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आज कांग्रेस के अपने नेता व कार्यकर्त्ता ही सरकार की पोल खोल रहे हैं। जिला भाजपा कार्यालय ऊना में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राजकुमार पठानिया, परविन्द्र लवेरिया, कार्यालय सचिव अजय पाराशर तथा अन्य भाजपा नेताओं की मौजूदगी में राणा ने कहा कि प्रदेश की जनता अब सरकार की वास्तविक स्थिति को भली-भांति समझ चुकी है। राणा ने कहा कि जो लोग सरकार को जनता से किए गए वायदे और गारंटियां पूरी करने की सलाह देते हैं, उन्हें कांग्रेस में विरोधी माना जाता है, जबकि सत्ता के गलियारों में चहेते लोगों को महत्व दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा जिन मुद्दों को पिछले सवा 2 वर्षों से उठाती रही है, आज उन्हीं विषयों पर कांग्रेस के भीतर से भी आवाजें उठ रही हैं। राजेन्द्र राणा ने नीरज भारती के हालिया बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब सरकार के खिलाफ उठ रहे आरोपों को प्रदेश की जनता गंभीरता से ले रही है, क्योंकि ये बातें विपक्ष नहीं, बल्कि कांग्रेस से जुड़े लोग स्वयं कह रहे हैं। राणा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं द्वारा ही सरकार पर भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से इन आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

राणा ने पेखूबेला सोलर पावर परियोजना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस परियोजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े विवादों और आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता को दरकिनार किया गया और नियमों की अनदेखी कर फैसले लिए गए।

राजेन्द्र राणा ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1972 से अब तक बनी 12 सरकारों ने कुल 68 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया, जबकि वर्तमान सरकार ने साढ़े 3 वर्षों में ही 41 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले लिया है।

 

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