Shimla: ट्राऊट मछली के संरक्षण पर खर्च होंगे 12 लाख रुपए : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 04 Aug, 2026 09:39 PM

shimla trout fish conservation

प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं के चलते नदियों के अस्तित्व और जलीय जीवन पर मंडरा रहे खतरे को लेकर प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

शिमला (मनोहर): प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं के चलते नदियों के अस्तित्व और जलीय जीवन पर मंडरा रहे खतरे को लेकर प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य की नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए न्यूनतम 15 प्रतिशत पर्यावरणीय जल प्रवाह बनाए रखना बेहद अनिवार्य है। इसके साथ ही अदालत ने मंडी जिला प्रशासन द्वारा गठित 'रिवर मॉनीटरिंग कमेटी' की कार्ययोजना को मंजूरी देते हुए प्रोजैक्ट प्रमोटर द्वारा जमा करवाए गए 12 लाख रुपए के फंड को अगले 3 वित्तीय वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खर्च करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अनुपालन हलफनामा दायर किया गया। सहायक मत्स्य निदेशक, मंडी के माध्यम से दाखिल इस रिपोर्ट में बताया गया कि जलविद्युत परियोजना के प्रमोटर द्वारा जमा की गई 12,00,000 की राशि का उपयोग वित्तीय वर्ष 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के दौरान किया जाएगा। इस बजट का मुख्य हिस्सा नदी में लुप्त हो रही बहुमूल्य 'ब्राऊन ट्राऊट' और 'रेनबो ट्राऊट' मछलियों के श्रेणीबद्ध संग्रहण पर खर्च होगा। इसका उद्देश्य केवल मछली पालन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि परियोजना क्षेत्र के आसपास के पूरे जलीय ईको सिस्टम को फिर से जीवित करना है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!