Edited By Kuldeep, Updated: 21 Jul, 2026 08:40 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन की खस्ताहाल स्थिति और नदियों के किनारे अवैध रूप से कूड़ा डंप किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन की खस्ताहाल स्थिति और नदियों के किनारे अवैध रूप से कूड़ा डंप किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों और नदियों के किनारों पर कचरा फैंकना 'ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026' का सीधा उल्लंघन है। ऐसी लापरवाही से मानसून के दौरान पूरा कचरा बहकर नीचे चला जाता है, जो जल स्रोतों को गंभीर रूप से प्रदूषित करता है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों और जिलाधिकारियों द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद सभी जिलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
डीएलएसए की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि हमीरपुर की कुणाह खड्ड, ब्यास नदी के किनारों और अन्य खड्डों/नालों के पास धड़ल्ले से कूड़ा डंप किया जा रहा है। भोटा नगर पंचायत में स्थित मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी प्लांट भी पूरी तरह उपेक्षित स्थिति में पाया गया। चम्बा के परेल में रावी नदी के किनारे और कबरिया स्थित फोरैस्ट बैरियर के पास अवैध रूप से कचरा फैंकने की तस्वीरें कोर्ट के सामने आईं। सुन्नी में स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्लांट की साइट सतलुज नदी के बिल्कुल करीब है, जिससे मानसून में जलस्तर बढ़ने पर वहां बाढ़ आ जाती है।
कोर्ट ने इस प्लांट को तुरंत सुरक्षित स्थान पर रिलोकेट (स्थानांतरित) करने के निर्देश दिए हैं। रामपुर के एमआरएफ प्लांट में अज्ञात कारणों से आग लगने के कारण मशीनरी जल गई थी, जिसके बाद नए प्लांट के लिए चिन्हित बढाल साइट की व्यवहार्यता पर दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने शिमला, चम्बा, बिलासपुर, कांगड़ा और कुल्लू के डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा उठाई गई आपत्तियों और हॉटस्पॉट्स को तुरंत साफ करवाएं और की गई कार्रवाई की अगली स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। प्रदेश के शहरी विकास निदेशालय के अनुसार राज्य में 9.47 करोड़ का गारबेज यूजर चार्ज (कचरा शुल्क) बकाया है, जिसमें से केवल 1.12 करोड़ रुपए ही वसूल हो पाए हैं। कोर्ट ने शेष बकाया राशि को तुरंत वसूलने के निर्देश दिए हैं।