Shimla: दिव्यांग केवल दिव्यांग होता है', शारीरिक रूप से अक्षम कोटे के भीतर जातिगत आरक्षण देना असंवैधानिक : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 29 Jul, 2026 09:18 PM

shimla reservation

हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में स्पष्ट किया है कि दिव्यांग श्रेणियों के तहत आरक्षित पदों के भीतर अनुसूचित जाति या अन्य जातियों के आधार पर उप-आरक्षण देना पूरी तरह से अवैध, मनमाना और असंवैधानिक है।

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में स्पष्ट किया है कि दिव्यांग श्रेणियों के तहत आरक्षित पदों के भीतर अनुसूचित जाति या अन्य जातियों के आधार पर उप-आरक्षण देना पूरी तरह से अवैध, मनमाना और असंवैधानिक है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए दोहराया कि 'एक दिव्यांग सिर्फ दिव्यांग होता है'''। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने याचिकाकर्त्ता होशियार सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार को उन्हें साल 2008 से सभी काल्पनिक लाभों के साथ शारीरिक शिक्षा शिक्षक के पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।

मामले के अनुसार वर्ष 2008 में शिक्षा विभाग ने कुल्लू जिले में दिव्यांग श्रेणी के तहत क्राफ्ट एंड वोकेशनल शिक्षकों के पदों को भरने के लिए एक विशेष अभियान चलाया था। याचिकाकर्त्ता होशियार सिंह जो 46 प्रतिशत सुनने की अक्षमता से पीड़ित हैं, ने इसके लिए इंटरव्यू दिया था। 27 जनवरी, 2008 को हुए पहले इंटरव्यू में होशियार सिंह ने 38.11 अंक प्राप्त कर मैरिट में पहला स्थान हासिल किया था।

इसके बावजूद बाद में विभाग ने चयन प्रक्रिया में बदलाव किया और यह दलील देते हुए उनका चयन नहीं किया कि उक्त पद अनुसूचित जाति वर्ग के श्रवण बाधित उम्मीदवार के लिए आरक्षित है, जबकि होशियार सिंह सामान्य श्रेणी से आते हैं। विभाग ने बाद में हमीरपुर जिले के एक अन्य दिव्यांग उम्मीदवार को चुन लिया, जिसे याचिकाकर्त्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्त्ता होशियार सिंह को 1 मार्च, 2008 (जब दूसरे उम्मीदवार को नियुक्त किया गया था) की बैक-डेट से पीईटी शिक्षक के पद पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। उन्हें वरिष्ठता सहित सभी परिणामी लाभ मिलेंगे, हालांकि वित्तीय लाभ काल्पनिक रहेंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि सरकार 3 महीने के भीतर नियुक्ति नहीं देती है तो समय सीमा समाप्त होने के बाद याचिकाकर्त्ता नियमित वेतन का हकदार होगा।

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