Edited By Kuldeep, Updated: 01 Jun, 2026 04:34 PM

हिमाचल की शांत वादियों में अब पारंपरिक नशों के अलावा बेहद खतरनाक और जानलेवा सिंथैटिक ड्रग्स ने भी दस्तक दे दी है।
शिमला (संतोष): हिमाचल की शांत वादियों में अब पारंपरिक नशों के अलावा बेहद खतरनाक और जानलेवा सिंथैटिक ड्रग्स ने भी दस्तक दे दी है। शिमला पुलिस द्वारा ढली चौक और पंजाब के खरड़ में की गई बड़ी कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में चिट्टे के साथ प्रतिबंधित ड्रग आइस (मेथामफेटामाइन) नामक प्रतिबंधित ड्रग बरामद की गई है। शिमला में प्रतिबंधित ड्रग आइस की यह खेप पहुंचना पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है। शिमला पुलिस ने बैकवर्ड लिंकेज और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई करते हुए पंजाब के खरड़ से ड्रग्स नैटवर्क के एक बड़े सप्लायर को दबोचा है। इस पूरे मामले में अब तक कुल 196 ग्राम चिट्टा, 47 ग्राम प्रतिबंधित ड्रग आइस (मेथामफेटामाइन) और 60,400 रुपए की नकदी बरामद की जा चुकी है। एएसपी शिमला अभिषेक ने प्रैसवार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि मामले की शुरूआत 29 मई को हुई, जब पुलिस थाना ढली की टीम को गोपनीय और विश्वसनीय सूचना मिली।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ढली चौक के पास स्थित एक मकान में स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में छापेमारी की। इस तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके से दो स्थानीय तस्करों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान अवंतिका नेगी (19) पुत्री साहिल नेगी निवासी ढली शिमला व प्रद्युमन (20) पुत्र संजू ठाकुर निवासी ठियोग, जिला शिमला के रूप में हुई। पुलिस ने इन दोनों के कब्जे से 65 ग्राम चिट्टा और 20 ग्राम प्रतिबंधित ड्रग आइस बरामद की। पुलिस ने तुरंत थाना ढली में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत मुकद्दमा दर्ज कर दोनों को हिरासत में ले लिया। कोर्ट ने इन्हें 2 जून तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।
बैकवर्ड लिंकेज से मुख्य सप्लायर टाइगर तक पहुंची पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों से कड़ी पूछताछ और उनके फोन के कॉल डिटेल व चैट के तकनीकी विश्लेषण व चैट से पुलिस को पता चला कि नशीले पदार्थों की यह खेप वे पंजाब के खरड़ से समर नाम के एक बड़े सप्लायर से लेकर आए थे। शिमला पुलिस की एक विशेष टीम ने तुरंत पंजाब के लिए कूच किया और मुख्य सप्लायर समर सिंह उर्फ टाइगर (32) को खरड़ (मोहाली) स्थित शिवालिक अपार्टमैंट से दबोच लिया। आरोपी मूल रूप से जिला फिरोजपुर, पंजाब का रहने वाला है। मुख्य सप्लायर टाइगर की गिरफ्तारी के समय उसके पास से 131 ग्राम चिट्टा, 27 ग्राम प्रतिबंधित ड्रग आइस और 60,400 रुपए की ड्रग मनी बरामद की गई। उसे भी शिमला लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 2 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
अब तक 43 सप्लायर गिरफ्तार, जारी है कार्रवाई : गौरव
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि शिमला पुलिस की यह कार्रवाई यह साफ संदेश देती है कि पुलिस अब सिर्फ छोटे पैडलर्स को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के मुख्य स्रोत और अंतरराज्यीय नैटवर्क को ध्वस्त कर रही है। इस साल में बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर शिमला पुलिस अब तक 43 बड़े सप्लायरों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। उन्होंने साफ किया है कि नशे के इस काले कारोबार की जड़ें काटने का यह अभियान आगे भी इसी तरह आक्रामक रूप से जारी रहेगा।
क्या है प्रतिबंधित ड्रग आइस
आइस जिसे वैज्ञानिक भाषा में मेथामफेटामाइन कहा जाता है, एक अत्यंत खतरनाक और अत्यधिक लत लगाने वाला सिंथैटिक स्टिमुलेंट ड्रग है। यह दिखने में कांच के छोटे टुकड़ों या चमकदार नीले-सफेद पत्थरों जैसी होती है, जिसके कारण इसे आइस या क्रिस्टल मैथ कहा जाता है।
चिट्टे से भी ज्यादा खतरनाक : जानकारों के मुताबिक, यह नशा हैरोइन या चिट्टे के मुकाबले दिमाग पर कई गुणा ज्यादा और सीधा असर करता है।
अत्यधिक महंगी : अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय बाजार में इसकी कीमत आम नशों से काफी ज्यादा होती है, जिसके कारण इसे हाई-सोसायटी ड्रग भी कहा जाता है।
जानलेवा प्रभाव : इसका सेवन करने से इंसान का सैंट्रल नर्वस सिस्टम पूरी तरह प्रभावित होता है। इसके लगातार इस्तेमाल से मतिभ्रम, अत्यधिक आक्रामकता, याददाश्त जाना और दिल का दौरा पड़ने जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो जाती हैं।