Edited By Kuldeep, Updated: 15 Oct, 2026 07:27 PM

एचआरटीसी की बसों से डीजल के खर्चे में कमी के साथ-साथ प्रदूषण पर भी लगाम लगाई जा रही है। निगम के बेड़े में शामिल 297 इलैक्ट्रिक बसों से रोजाना करीब 8 लाख रुपए के डीजल खर्च की बचत होने का दावा किया जा रहा है।
शिमला (राजेश): एचआरटीसी की बसों से डीजल के खर्चे में कमी के साथ-साथ प्रदूषण पर भी लगाम लगाई जा रही है। निगम के बेड़े में शामिल 297 इलैक्ट्रिक बसों से रोजाना करीब 8 लाख रुपए के डीजल खर्च की बचत होने का दावा किया जा रहा है। अब सरकार की नजर एक हजार और इलैक्ट्रिक बसों पर है। योजना के मुताबिक, वर्ष 2027 में ये नई बसें प्रदेश में लाई जा सकती हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को धीरे-धीरे इलैक्ट्रिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एचआरटीसी ने मौजूदा इलैक्ट्रिक बसों से हर महीने करीब ढाई करोड़ रुपए की आय अर्जित करने का लक्ष्य रखा है।
रोजाना 8 लाख की बचत, अब कमाई बढ़ाने की चुनौती
297 इलैक्ट्रिक बसों से डीजल खर्च में होने वाली बचत निगम के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। ईंधन पर खर्च कम होने से परिचालन लागत घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलैक्ट्रिक बसों की वास्तविक आर्थिक सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उनका संचालन कितना प्रभावी रहता है और उनसे कितनी आय अर्जित होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए निगम अब बसों के रूट, यात्रियों की संख्या और कमाई की संभावनाओं की समीक्षा कर रहा है।
इलैक्ट्रिक बसों के मौजूदा रूट को 10 से 20 किलोमीटर तक बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। जिन क्षेत्रों में यात्रियों की मांग और संचालन की परिस्थितियां अनुकूल होंगी, वहां बसों को आगे तक चलाने पर विचार किया जा सकता है।
चार्जिंग नैटवर्क के लिए 26.59 करोड़, आगे भी भेजा जाएगा प्रस्ताव
इलैक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ाने के साथ चार्जिंग व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी है। इसी दिशा में बिजली वाहनों के चार्जिंग केंद्र विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल को 26.59 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इसके अलावा नए चार्जिंग केंद्रों के लिए दोबारा प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।
परिवहन विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश ओंकार शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत हिमाचल प्रदेश में हरित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश में ई-चार्जिंग स्टेशनों का नैटवर्क विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही एचआरटीसी के बेड़े में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त 1,000 नई बसें शामिल करने की योजना है।