Edited By Kuldeep, Updated: 13 Oct, 2026 08:19 PM

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर स्थित रकछम-छितकुल वन्यजीव अभ्यारण्य में अंतर्राष्ट्रीय पक्षी अवलोकन कार्यक्रम में भारत सहित 8 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर स्थित रकछम-छितकुल वन्यजीव अभ्यारण्य में अंतर्राष्ट्रीय पक्षी अवलोकन कार्यक्रम में भारत सहित 8 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, स्कॉटलैंड, इंगलैड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने 35 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया। इनमें हिमालयन मोनाल, हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध, हिमालयन बजर्ड, ब्राऊन डिपर, ग्रे वैगटेल, व्हाइट वैगटेल, ऑलिव-बैक्ड पिपिट, प्लम्बियस वाटर रैडस्टार्ट, ब्लू-फ्रंटेड रैडस्टार्ट, रॉक बंटिंग तथा फिंच की विभिन्न प्रजातियों सहित अनेक अन्य हिमालयी पक्षी शामिल थे। इस कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन किन्नौर, वन्यजीव मंडल सराहन, वन्यजीव रेंज सांगला, ग्राम पंचायत रकछम, यूथ क्लब रकछम तथा माऊंटेनियरिंग क्लब रकछम के संयुक्त प्रयासों से किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना तथा वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और जिम्मेदार प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना था।
पक्षी अवलोकन के लिए 2 दल गठित
प्रतिभागियों को व्यवस्थित रूप से पक्षी अवलोकन करवाने तथा विभिन्न प्रजातियों की पहचान में सहायता प्रदान करने के लिए 2 दल गठित किए गए। प्रथम दल का नेतृत्व प्रशांत चौहान नेगी ने किया। इस दल में नंद किशोर नेगी, अक्षय कुमार व वन रक्षक शामिल रहे। द्वितीय दल का नेतृत्व तेनजिन नेगी ने किया। इस दल में अल्पना नेगी, वन मित्र तथा खंड वन अधिकारी रकछम संतोष ठाकुर शामिल रहे।
पक्षी अवलोकन पर्यावरणीय शिक्षा व वन्यजीव संरक्षण बढ़ाने का प्रभावी माध्यम : संतोष
खंड वन अधिकारी रकछम संतोष ठाकुर ने बताया कि पक्षी अवलोकन केवल पर्यटन गतिविधि नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय शिक्षा, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और वन्यजीव संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि सांगला घाटी में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। यदि पर्यटन गतिविधियों का संचालन पर्यावरणीय मानकों और संरक्षण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाए तो इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के दौरान प्राकृतिक आवासों, पक्षियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
समृद्ध पक्षी विविधता से परिचय करवाया : नेगी
माऊंटेनियरिंग क्लब रकछम के उपाध्यक्ष नंद किशोर नेगी जॉनी ने कहा कि स्थानीय युवाओं को क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता से परिचित करवाना इस कार्यक्रम का उद्देश्य था। उन्होंने इसके लिए वन विभाग, प्रकृतिविदों, पक्षी प्रेमियों और स्थानीय स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
ऑस्ट्रिया से आए प्रतिनिधि जैंगर्ल भी खुश
ऑस्ट्रिया से आए बर्न्ड जैंगर्ल भी इस कार्यक्रम प्रसन्न नजर आए। उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि इससे पहले भी वे जंगलों में भ्रमण के दौरान पक्षियों की आवाजें सुना करते थे, लेकिन इस निर्देशित पक्षी अवलोकन कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें पक्षियों को नजदीक से देखने, उनकी पहचान करने तथा उनकी विशिष्ट विशेषताओं को समझने का अवसर मिला। उन्होंने सांगला घाटी की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को सामने लाने में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।