Himachal: पैट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर लगी आग, जानिए आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर

Edited By Vijay, Updated: 23 May, 2026 12:56 PM

petrol and diesel price hike

देश सहित प्रदेश में पैट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है। पिछले 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब तेल के दामों में वृद्धि की गई है। शनिवार को हुई ताजा बढ़ौतरी के तहत पैट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है।

शिमला: देश सहित प्रदेश में पैट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है। पिछले 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब तेल के दामों में वृद्धि की गई है। शनिवार को हुई ताजा बढ़ौतरी के तहत पैट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। इस वृद्धि के बाद राज्य की राजधानी शिमला में सामान्य पैट्रोल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर के आंकड़े को लगभग छू चुकी है। शिमला में सामान्य पैट्रोल की कीमत अब 99.96 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं, प्रीमियम या पावर पैट्रोल के दाम उछलकर 109.18 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन का मुख्य आधार माने जाने वाले डीजल की कीमत भी बढ़कर 91.86 रुपए प्रति लीटर हो गई है। देश सहित प्रदेश

आम जनता पर क्या पड़ेगा इसका सीधा असर?

ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ौतरी का सीधा प्रहार आम आदमी की जेब और उसके जीवन स्तर पर पड़ेगा। डीजल के महंगे होने से ट्रकों और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) में सीधा इजाफा होगा। माल ढुलाई महंगी होने का सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। खाद्य पदार्थ, सब्जियां, राशन और रोजमर्रा की आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ेंगे। सफर करना महंगा होने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने से आम जनता, खासकर मध्यम और गरीब वर्ग के घर का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा जाएगा, जिससे उनके सामने नई आर्थिक चुनौतियां खड़ी होंगी।

सेब किसानों और राज्य की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार

हिमाचल प्रदेश के लोगों की आजीविका का बड़ा साधन कृषि और बागवानी है। इस महंगाई का सबसे गहरा और नकारात्मक प्रभाव राज्य के महत्वपूर्ण सेब उद्योग पर पड़ने की आशंका है। डीजल के दाम बढ़ने से सेब को बागानों से मंडियों तक पहुंचाने का मालभाड़ा (फ्रेट) बढ़ जाएगा। ढुलाई महंगी होने से एक तरफ जहां सेब उत्पादक किसानों का मुनाफा घटेगा, वहीं दूसरी तरफ बाजार में उपभोक्ताओं को भी सेब महंगे दाम पर खरीदना पड़ेगा। कृषि पर निर्भर राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

तेल कंपनियों के अनुसार इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगातार आ रहा उछाल है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार की इस तेजी का सीधा और त्वरित असर देश की खुदरा ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है।

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