चमियाणा सुपर स्पैशलिटी अस्पताल में हार्ट के 2 अहम टैस्ट बंद, टांडा में सुई-सिरिंज तक नहीं : राकेश जम्वाल

Edited By Vijay, Updated: 18 Sep, 2026 08:59 PM

mla rakesh jamwal

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सुक्खू सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार सुपर स्पैशलिटी अस्पतालों और नई स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन....

धर्मशाला (ब्यूरो): भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सुक्खू सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार सुपर स्पैशलिटी अस्पतालों और नई स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चमियाणा के सुपर स्पैशलिटी अस्पताल में हृदय रोगियों के दो महत्वपूर्ण टैस्ट होल्टर मॉनीटरिंग और एंबुलेटरी ब्लड प्रैशर मॉनीटरिंग (एबीपीएम) स्टाफ की कमी के कारण बंद पड़े हैं। वहीं टांडा मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थान में मरीजों को सुई, सिरिंज, ग्लव्स और जरूरी दवाइयों तक के लिए परेशान होना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चमियाणा में इन दोनों टैस्ट के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

राकेश जम्वाल ने कहा कि चमियाणा में तकनीकी कर्मचारी को स्थानांतरित किए जाने के बाद पैदा हुई स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि सरकार एक अस्पताल में व्यवस्था खड़ी करने की बजाय पहले से उपलब्ध मानव संसाधन को दूसरी जगह भेजकर स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर क्यों कर रही है। जम्वाल ने कहा कि सरकार को समझना होगा कि अस्पताल केवल भवनों से नहीं चलते। अस्पतालों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ, दवाइयां, उपकरण और समय पर भुगतान की व्यवस्था जरूरी है। यदि पहले से स्थापित स्वास्थ्य संस्थानों से डाॅक्टरों और कर्मचारियों को हटाकर दूसरी जगह भेजा जाएगा और वहां भी पर्याप्त स्टाफ नहीं होगा, तो इसका खामियाजा अंततः प्रदेश की जनता और मरीजों को ही भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं यह कह रहे हैं कि 2 लाख रुपए के इलाज के बदले 4 लाख रुपए वसूले जा रहे हैं, तो सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?

राकेश जम्वाल ने कहा कि दूसरी ओर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल टांडा मेडिकल कॉलेज में भी स्थिति चिंताजनक है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार हिमकेयर और आयुष्मान भारत की करीब 85 करोड़ रुपए की लंबित राशि के कारण मेडिकल सामग्री और दवाइयों की खरीद प्रभावित होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में सुई, सिरिंज, ग्लव्स सहित अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने तथा मरीजों को दवाइयां बाहर से खरीदने की शिकायतों का उल्लेख है।

हिमाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp group को Join करें 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!