Edited By Vijay, Updated: 13 Oct, 2026 12:22 PM

देवभूमि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति में मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल के तहत आने वाला मां भद्रकाली धाम मुंदलीधार विशेष धार्मिक और आस्था का केंद्र है।
सुंदरनगर (सोढी): देवभूमि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति में मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल के तहत आने वाला मां भद्रकाली धाम मुंदलीधार विशेष धार्मिक और आस्था का केंद्र है। निहरी तहसील की सर्वोच्च चोटी पर खुले आसमान के नीचे विराजमान मां भद्रकाली का यह पावन स्थल शक्ति उपासना, गूर परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है। अब स्थानीय लोगों ने इस रमणीक और धार्मिक स्थल को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाने की मांग तेज कर दी है।
राक्षस के वध से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जनकल्याण मंच पांगणा के अध्यक्ष डॉ. हिमेंद्र बाली के अनुसार, इस स्थान को लेकर स्थानीय जनश्रुति है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में एक अत्याचारी राक्षस का आतंक था। लोगों की पुकार पर देवी ने भद्रकाली का उग्र रूप धारण कर उस राक्षस का अंत किया था। लोक मान्यता है कि इसके बाद भक्तों के विशेष आग्रह पर देवी ने मुंदलीधार की इसी चोटी को अपना धाम बनाया। तभी से यह स्थल मां की शक्ति और कृपा के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
प्रत्येक माह की संक्रांति पर होता है विशेष धार्मिक अनुष्ठान
मुंदलीधार में मां भद्रकाली का विशाल श्रीविग्रह स्थापित है, जो खुले आसमान के नीचे विराजमान है। एक और विशेष बात यह है कि देवी के चरणों में शिवलिंग भी स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र है। नवरात्रि के पावन पर्व और प्रत्येक माह की संक्रांति पर यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जहां भक्त सुख-शांति और समृद्धि की कामना लेकर पहुंचते हैं।
सदियों पुरानी है गूर परंपरा
संस्कृति मर्मज्ञ डॉ. जगदीश शर्मा बताते हैं कि यहां की गूर (देवता के प्रतिनिधि) परंपरा स्थानीय देवसंस्कृति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्य गूर दौलतराम सहित देवी के गण माने जाने वाले अन्य देवताओं से जुड़ी मान्यताएं यहां पीढ़ियों से निभाई जा रही हैं, जो आज भी जीवंत हैं।
धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की उठी मांग
धार्मिक महत्व के साथ-साथ मुंदलीधार अपनी अद्भुत पर्वतीय सुंदरता और शांत वातावरण के लिए भी प्रसिद्ध है। निहरी तहसील मुख्यालय फेगड़ू से दाईं ओर जाने वाली सड़क पर मात्र 3 किलोमीटर की दूरी तय कर छोटे वाहनों से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हालांकि, यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेना उचित रहता है। युवा समाजसेवी तोमेश, भाग चंद ठाकुर और दिलेराम सहित स्थानीय निवासियों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मुंदलीधार को हिमाचल के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर लाया जाए। यहां सड़क, पेयजल, स्वच्छता, विश्राम स्थल और साइनेज (संकेतक) जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं ताकि इसे एक बेहतरीन धार्मिक और ईको-टूरिज्म केंद्र बनाया जा सके। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों ने यहां की लोक गाथाओं और देव परंपराओं के दस्तावेजीकरण की भी मांग की है, ताकि इस अनमोल सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके।
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