Edited By Kuldeep, Updated: 26 Jul, 2026 06:32 PM

लोक निर्माण विभाग व सरकार की अनदेखी के चलते अनुसूचित जाति वर्ग का एक वृद्ध सेवानिवृत्त कर्मचारी वर्षों के लंबे इंतजार और उच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद पैंशन न मिलने से निराश होकर अब आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने की बात कह रहा है।
हमीरपुर (राजीव): लोक निर्माण विभाग व सरकार की अनदेखी के चलते अनुसूचित जाति वर्ग का एक वृद्ध सेवानिवृत्त कर्मचारी वर्षों के लंबे इंतजार और उच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद पैंशन न मिलने से निराश होकर अब आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने की बात कह रहा है। यह जानकारी समाजसेवी राहवीर रविंद्र सिंह डोगरा ने दी है। उन्होंने बताया कि सुजानपुर उपमंडल की चमियाणा पंचायत के त्रियाम्बली गांव निवासी रतन चंद वर्ष 2012 में लोक निर्माण विभाग सुजानपुर से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने विभाग में कुल 24 वर्ष 3 महीने की सेवाएं दीं, जिनमें 9 वर्ष 3 महीने स्थायी व 15 वर्ष अस्थायी सेवा शामिल थी। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार पैंशन की पात्रता के लिए 10 वर्ष की स्थायी सेवा अनिवार्य होती है। यदि किसी कर्मचारी की स्थायी सेवा 10 वर्ष से कम हो तो उसकी 5 वर्ष की अस्थायी सेवा को 1 वर्ष की स्थायी सेवा के बराबर गिना जाता है। इस नियम के तहत रतन चंद की 15 वर्ष की अस्थायी सेवा को 2 वर्ष की स्थायी सेवा माना गया, जिससे उनकी कुल अर्हता सेवा 11 वर्ष 3 महीने बनती है।
यह अवधि पैंशन की सभी शर्तों को पूरा करती है व इसके बावजूद विभाग ने आज तक उनकी पैंशन का मामला लटका रखा है। उन्होंने बताया कि रतन चंद का कहना है कि सुजानपुर के पूर्व विधायक राजिंद्र राणा ने 5 वर्ष तक उन्हें केवल आश्वासन ही दिया व इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां से अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को नियमानुसार कार्रवाई के आदेश दिए थे। वहीं वर्ष 2025 में कोर्ट के आदेश की प्रति लेकर वह सुजानपुर के वर्तमान विधायक कैप्टन रणजीत राणा से भी मिले, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद जून माह में वह पैंशन की गुहार लेकर शिमला पहुंचे और मुख्यमंत्री, लोक निर्माण मंत्री तथा ईइनसी कार्यालय में सभी जरूरी दस्तावेज सौंपे फिर भी कोई समाधान नहीं निकला।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
लगातार उपेक्षा, आर्थिक व मानसिक तंगी से तंग आकर हताश बुजुर्ग ने अंतत: समाजसेवी रविंदर सिंह डोगरा के गवारड़ू स्थित आवास पर पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई। डोगरा ने बताया कि रतन चंद अस्वस्थ हैं और लगातार हो रही अनदेखी के कारण गहरा सदमा झेल रहे हैं, जिससे वह आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने का मन बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले की गंभीरता व संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को साक्ष्यों सहित पत्र भेजा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पीड़ित बुजुर्ग रतन चंद को जल्द से जल्द पैंशन प्रदान कर उन्हें न्याय दिलाने की अपील की है।