Hamirpur: सेना के लिए अत्याधुनिक ड्रोन बनाएगा सर्वेश, रक्षा मंत्रालय ने मंजूर किए 3.50 करोड़

Edited By Kuldeep, Updated: 22 Sep, 2026 05:02 PM

hamirpur army drone

कहते हैं कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती और प्रतिभाशाली बच्चे को कोई भी मुश्किल आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

हमीरपुर (ब्यूरो): कहते हैं कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती और प्रतिभाशाली बच्चे को कोई भी मुश्किल आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। इसी का एक उदाहरण सामने आया है राजकीय पॉलीटैक्निक कालेज हमीरपुर (बड़ू) में। जी हां इस कालेज के एक छात्र सर्वेश शर्मा ने भारतीय थल सेना की एक बहुत बड़ी समस्या का समाधान निकालते हुए एक ऐसा ड्रोन तैयार करने में कामयाबी हासिल की है, जोकि न तो दुश्मन के राडार की पकड़ में आएगा और न ही कोई जैमर इसे जाम कर पाएगा। कंप्यूटर इंजीनियरिंग के 5वें सैमेस्टर के छात्र सर्वेश शर्मा के इस प्रोजैक्ट के लिए रक्षा मंत्रालय की डिफैंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन एवं इनोवेशन फॉर डिफैंस इक्सीलैंस की ओर से 3.50 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर की गई है। रक्षा मंत्रालय के डिफैंस प्रोडक्शन विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं सीईओ दिनेश माहौर ने सोमवार को ही इस बजट को स्वीकृति प्रदान की। गरीब परिवार से संबंध रखने वाले सर्वेश की इस उपलब्धि ने न केवल अपने परिवार एवं संस्थान को, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश को गौरवान्वित किया है।

यहां से मिली प्रेरणा
दरअसल सर्वेश ने आईआईटी जोधपुर और कोनार्क कोर के राष्ट्रीय स्तरीय ओपन कार्ड बोर्ड ड्रोन कंपीटिशन में भाग लिया था, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों की 50 टीमों ने भाग लिया था और अपने-अपने इनोवेटिव आइडिया रखे थे। इसी दौरान भारतीय सेना की बॉर्डर सर्विलांस से संबंधित समस्या पर भी चर्चा की गई थी। इस प्रतियोगिता में सर्वेश की टीम ने 10 लाख रुपए का चौथा पुरस्कार हासिल किया था। यहीं से प्रेरित होकर सर्वेश ने भारतीय सेना की समस्या के समाधान के लिए ड्रोन तैयार करने पर काम आरंभ किया और इसमें कामयाबी भी हासिल कर ली। इस प्रोजैक्ट पर 87 हजार रुपए खर्च हुए। इसके बाद सर्वेश ने डिफैंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन व इनोवेशन फॉर डिफैंस इक्सीलैंस के प्रोजेक्ट के तहत स्टार्टअप के लिए आवेदन किया, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

लक्ष्य पूरा करने के लिए 20 दिन का समय निर्धारित
सर्वेश अब भारतीय सेना के लिए रुद्रा ऐज टी-1 ड्रोन तैयार करेगा, जोकि सीमा पर निगरानी में बहुत बड़ा मददगार साबित होगा। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजैक्ट से संबंधित औपचारिकताएं पूर्ण करने के लिए 20 दिन का समय दिया है और इसका इनक्यूबेशन सैंटर आईआईटी रुड़की में बनाया गया है। यानि सर्वेश अब आईआईटी रुड़की की लैब में इस प्रोजैक्ट पर काम करेगा, जिसे 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस उपलब्धि पर पॉलीटैक्निक कालेज प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, संस्थान के कंप्यूटर इंजीनियिरिंग के विभागाध्यक्ष समीर भारती व अन्य शिक्षकों ने सर्वेश को बधाई देते हुए उसके सुनहरे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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