Mandi: 10 हजार फुट की ऊंचाई पर अखरोटों व फूलों की बारिश, शैटाधार में उमड़ा आस्था का सैलाब

Edited By Kuldeep, Updated: 17 Sep, 2026 09:11 PM

gohar walnut rain

सराज घाटी के धार्मिक स्थल शैटाधार में वीरवार को सायर पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। समुद्रतल से करीब 10 हजार फुट की ऊंचाई पर आयोजित पौराणिक सायर मेले में सराज घाटी के अलावा मंडी-कुल्लू जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

बालीचौकी/गोहर (फरेंद्र/सतीश): सराज घाटी के धार्मिक स्थल शैटाधार में वीरवार को सायर पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। समुद्रतल से करीब 10 हजार फुट की ऊंचाई पर आयोजित पौराणिक सायर मेले में सराज घाटी के अलावा मंडी-कुल्लू जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। देव शैटीनाग के दर्शनों के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी तथा दिनभर शैटाधार का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं से भरा रहा। चार बढ़ों की परंपरा के तहत इस बार देव शैटीनाग चारों बढ़ों के साथ शैटाधार पहुंचे। मेला कमेटी के प्रधान फते सिंह ने बताया कि देवता के 4 बढ़ जुफरबढ़, चेत बढ़, आगशी और निचली चेत बढ़ हैं। कारदार हिम्मत राम की अगुवाई में देवता को वीरवार सुबह बुंग कोठी से धार्मिक स्थल शैटाधार लाया गया। शैटाधार पहुंचने पर महिलाओं ने अखरोट और पुष्प वर्षा कर देवता का स्वागत किया।

हालांकि सुबह से ही शैटाधार में भारी बारिश का दौर जारी रहा, लेकिन खराब मौसम भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सका। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का शैटाधार पहुंचना जारी रहा और दिनभर पूरा मेला परिसर लोगों से भरा रहा। मेले में सराज की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं की अनूठी झलक देखने को मिली। सायर पर्व के अवसर पर हजारों लोगों ने एक साथ पारंपरिक नाटी डाली। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नाटी में हिस्सा लेकर मेले की रौनक बढ़ाई। 3 दिन तक चलने वाले मेले में इस बार व्यापारिक गतिविधियां भी खूब देखने को मिल रही हैं। पहली बार 300 से अधिक व्यापारी यहां पहुंचे हैं। मेले में स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटक भी खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं।

भारी भीड़ के बीच व्यवस्थाओं की कमी, मुख्य मार्गों पर लगा जाम
शैटाधार के सायर मेले में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने से मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। स्थानीय लोगों और मेलार्थियों के अनुसार इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद भीड़ नियंत्रण, यातायात और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त व्यवस्थाएं नजर नहीं आईं। वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने कहा कि मेले में उमड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए थी। लोगों ने भविष्य में शैटाधार और सराज घाटी में होने वाले बड़े पारंपरिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

नरोल से बाहर आए देवी-देवता, कुल देवताओं को जूब अर्पित कर मांगी सुख-समृद्धि
सायर संक्रांति के अवसर पर सराज क्षेत्र के कई देवी-देवता अपने नरोल से बाहर आए और श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। चुंजवाला महादेव, देव मार्कंडेय ऋषि, देव शैटीनाग समेत अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में धार्मिक आयोजन हुए। सायर पर्व पर श्रद्धालुओं ने अपने-अपने कुल देवताओं को पुष्प के साथ जूब अर्पित की। देव परंपरा के अनुसार इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि अपनी-अपनी घाटी के अधिष्ठाता देवता क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए शक्तियां प्राप्त करते हैं।

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