Edited By Vijay, Updated: 29 Oct, 2026 06:46 PM

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक कथित सुनियोजित ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हमीरपुर पुलिस ने राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान हमीरपुर के प्रिंसिपल की औपचारिक शिकायत के आधार पर पुलिस थाना सदर में एफआईआर दर्ज की है।
हमीरपुर (राजीव): हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक कथित सुनियोजित ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हमीरपुर पुलिस ने राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान हमीरपुर के प्रिंसिपल की शिकायत के आधार पर पुलिस थाना सदर में एफआईआर दर्ज की है। इस धोखाधड़ी का शिकार संस्थान में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के 5वें सैमेस्टर में पढ़ने वाला एक छात्र हुआ है। शातिर ठगों ने एक फर्जी रक्षा ग्रांट का झांसा देकर इस बड़े ऑनलाइन फ्रॉड को अंजाम दिया है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने बड़ी चालाकी से डिजिटल पत्राचार के माध्यम से छात्र को यह विश्वास दिलाया कि उसके रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) नामक प्रोजैक्ट के लिए भारत सरकार के रक्षा नवाचार संगठन की आईडैक्स पहल के तहत 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर की गई है। छात्र ठगों के इस सुनियोजित जाल में फंस गया और इसे सच मान बैठा।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अक्तूबर 2026 में रक्षा नवाचार संगठन से प्राप्त एक आधिकारिक सूचना में स्पष्ट किया गया कि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उक्त छात्र या उससे जुड़े किसी भी स्टार्टअप को कभी कोई ग्रांट स्वीकृत या जारी नहीं की गई है। संस्थान के प्रिंसिपल ने बताया कि छात्र एक गंभीर ऑनलाइन ठगी का शिकार हुआ प्रतीत होता है। इस घटना के बाद छात्र का चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में उपचार चल रहा है।
इस गंभीर मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 319 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम 2000 की धारा 66सी और 66डी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए सभी संबंधित दस्तावेजों, इलैक्ट्रॉनिक पत्राचार और डिजिटल उपकरणों की व्यवस्थित तरीके से गहन जांच कर रही है ताकि इस धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि वे इस संवेदनशील समय में छात्र और उसके परिवार की निजता का सम्मान करें और बिना पुष्टि की जानकारी या अफवाहें न फैलाएं।
इस घटना के मद्देनजर हमीरपुर पुलिस ने नागरिकों, छात्रों, नवोन्मेषकों और शिक्षण संस्थानों के लिए एक एडवायजरी जारी की है। पुलिस ने आगाह किया है कि रक्षा, अनुसंधान या नवाचार निकायों से सरकारी ग्रांट, वित्तीय सहायता या चयन से संबंधित किसी भी संचार (ईमेल/मैसेज) पर आंख मूंदकर विश्वास न करें। ऐसी किसी भी जानकारी की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक वैबसाइट्स या कार्यालयों से अवश्य करें। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हैल्पलाइन नंबर 1930, आपातकालीन सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) 112 पर कॉल करे या साइबर क्राइम पोर्टलपर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाए। समय पर शिकायत दर्ज करवाना ही डिजिटल धोखाधड़ी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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