Shimla News: लंबित मांगों को लेकर फूटा दृष्टिहीन संघ का गुस्सा, सचिवालय के बाहर किया चक्का जाम....पुलिस के साथ धक्का-मुक्की

Edited By Vijay, Updated: 16 Jun, 2026 06:01 PM

blind association protest outside the secretariat

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर दृष्टिहीन संघ का गुस्सा फूट पड़ा। छोटा शिमला स्थित राज्य सचिवालय के समीप संघ के सदस्यों ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम कर दिया, जिससे...

शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर दृष्टिहीन संघ का गुस्सा फूट पड़ा। छोटा शिमला स्थित राज्य सचिवालय के समीप संघ के सदस्यों ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम कर दिया, जिससे राजधानी की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। हालात को नियंत्रण में करने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी हुई। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए संघ ने साफ कर दिया है कि वे पिछले 976 दिनों से शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब उनके धैर्य का बांध टूट रहा है।

सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप
दृष्टिहीन संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। इनमें मुख्य रूप से सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित क्लास-4 के पदों का बड़ा बैकलॉग खाली पड़ा है। इसे एक विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से तुरंत भरने, वर्तमान दिव्यांग पैंशन को बढ़ाकर 5100 रुपए प्रतिमाह करने, दिव्यांगों को मिलने वाली सहारा पेंशन पिछले 12 महीनों से बंद पड़ी है, जिसे बिना देरी के बहाल करने, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं के तहत दिव्यांगों को बिना किसी शर्त के लाभ प्रदान करने और यू.डी.आई.डी. कार्ड की व्यवस्था को प्रदेश में और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना शामिल है।

976 दिनों से मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे दृष्टिहीन
लगातार 976 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे दृष्टिहीन संघ के सदस्यों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर निराशा जताई है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की ओर से अभी तक कोई भी ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि सरकार के मंत्री और विधायक जल्द ही उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आगे नहीं आते हैं, तो यह आंदोलन और भी तेज किया जाएगा। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे लगातार सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

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