Edited By Kuldeep, Updated: 23 Jun, 2026 06:52 PM

एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सचिवालय में मंगलवार को एचआरटीसी ड्राइवर यूनियन एवं कंडक्टर यूनियन की अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम के साथ हुई वार्ता विफल हो गई है।
शिमला (राजेश): एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सचिवालय में मंगलवार को एचआरटीसी ड्राइवर यूनियन एवं कंडक्टर यूनियन की अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम के साथ हुई वार्ता विफल हो गई है। यह वार्ता पहले उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ होनी थी लेकिन किन्हीं कारणों से यह वार्ता उपमुख्यमंत्री के साथ नहीं हो पाई। वहीं वार्ता के विफल होने के बाद कर्मचारियों ने 24 जून की मध्यरात्रि से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है, वहीं सरकार ने इसे रोकने के लिए एस्मा (आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम) लागू कर दिया है।
इसके तहत एचआरटीसी कर्मचारियों पर अगले 6 माह तक हड़ताल करने पर प्रतिबंध रहेगा। परिवहन विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना में कहा है कि सार्वजनिक परिवहन सेवाएं यात्रियों की आवाजाही, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और जनहित के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की हड़ताल से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कर्मचारी हड़ताल शुरू नहीं कर सकता, उसमें शामिल नहीं हो सकता और न ही उसे बढ़ावा दे सकता है। आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ एस्मा के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वार्ता के बाद ओल्ड बस स्टैंड पर गरजे कर्मचारी, बोले- हम कर रहे काम छोड़ो आंदोलन
वार्ता के बाद ओल्ड बस स्टैंड पर एचआरटीसी कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की और सरकार के प्रति रोष प्रकट किया। इस मौके पर ड्राइवर यूनियन के प्रधान मान सिंह और कंडक्टर यूनियन के अध्यक्ष प्रीत महेंद्र व महासचिव दीपेंद्र कंवर ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों पर एस्मा लागू किया है लेकिन कर्मचारी सिर्फ काम छोड़ो आंदोलन कर रहे हैं। ड्यूटी पर आएंगे लेकिन बसें नहीं चलाएं और न ही कंडक्टर बसों में सेवाएं देंगे। उन्होंने कहा कि निगम के चालक-परिचालकों के पास अब पैसा नहीं है कि वे अपने पैसों से रूटों पर जाएं। यदि सरकार पैसा देगी तो वे बसें चलाएंगे। यदि पैसा नहीं दिया तो बसें नहीं चलाएंगे और आंदोलन हर हाल में होकर रहेगा।
निगम की लगभग 2800 बसें प्रतिदिन सेवाएं देती हैं। ऐसे में यदि हड़ताल होती है तो विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यूनियनों के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश भर के यात्री फिलहाल 25 से आगे दिनों में बसों की बुकिंग न करवाएं।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
एचआरटीसी कर्मचारी मुख्य रूप से रात्रि अतिरिक्त कार्य भत्ते का भुगतान, महंगाई भत्ते की लंबित किस्तों की अदायगी और लंबित चिकित्सा बिलों के भुगतान की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वित्तीय देयों का भुगतान लंबित पड़ा है।