Una News: तिरंगे में लिपट कर घर लौटा ऊना का लाल, सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई; 11 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

Edited By Vijay, Updated: 30 Jun, 2026 01:33 PM

soldier vishambar singh given final farewell with military honors

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बंगाणा उपमंडल के तहत आने वाली मलांगड़ पंचायत के एक परिवार ने देश सेवा की जो कीमत चुकाई है, वह किसी का भी कलेजा चीर देने के लिए काफी है। इस परिवार के मुखिया और पूर्व सैनिक रसीला राम ने देश के लिए अपने दोनों जवान बेटे खो...

बंगाणा/ऊना (शर्मा/सुरेंद्र): हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बंगाणा उपमंडल के तहत आने वाली मलांगड़ पंचायत के एक परिवार ने देश सेवा की जो कीमत चुकाई है, वह किसी का भी कलेजा चीर देने के लिए काफी है। इस परिवार के मुखिया और पूर्व सैनिक रसीला राम ने देश के लिए अपने दोनों जवान बेटे खो दिए हैं। कुछ समय पहले उनके छोटे बेटे जसविंदर सिंह  ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था और अब उनके बड़े बेटे हवलदार विशम्बर सिंह (35) का भी ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। दोनों बेटों के जाने से इस परिवार का आंगन हमेशा के लिए सूना हो गया है।

साइकिल पर यूनिट लौटते समय उठा था सीने में तेज दर्द
जानकारी के अनुसार साल 2008 में भारतीय सेना की आर्टिलरी रैजीमैंट में भर्ती हुए हवलदार विशम्बर सिंह इन दिनों देहरादून में तैनात थे। बीते सोमवार सुबह नियमित शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी/ड्रिल) के बाद जब वह साइकिल पर अपनी यूनिट लौट रहे थे, तभी अचानक उनके सीने में तेज दर्द हुआ। साथी जवान उन्हें तुरंत आर्मी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

तिरंगे में लिपटे जवान को देख बेसुध हुईं मां और पत्नी
जैसे ही देहरादून से विशम्बर सिंह की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव मलांगड़ पहुंची तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। तिरंगे में लिपटे जवान को देख पहले से टूट चुकीं मां शीला देवी और पत्नी सोनिया देवी लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। ग्रामीणों ने बताया कि विशम्बर सिंह महज 25 दिन पहले ही छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे। कुछ दिन पहले जो जवान परिवार के साथ हंसता-मुस्कुराता नजर आ रहा था, आज उसकी पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी लौटी है।

2 मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
विशम्बर सिंह अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटे छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा 11 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा अभी महज 6 महीने का है। परिवार में कुछ महीने पहले ही दूसरे बेटे के जन्म की खुशियां मनाई गई थीं, लेकिन अब यह मासूम हमेशा के लिए पिता के साये से वंचित हो गया है। परिवार के सामने अब इन बच्चों के भविष्य और परवरिश की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

11 साल के बेटे ने दी पिता की चिता को मुखाग्नि 
जैसे ही पार्थिव देह गांव पहुंची, इलाके के लोगों, रिश्तेदारों और आसपास के ग्रामीणों का हुजूम अपने वीर को श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़ा। प्रशासन की तरफ से एसडीएम बंगाणा सोनू गोयल, डीएसपी हेडक्वार्टर अजय ठाकुर, देहरादून से आए सैन्य अधिकारियों, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र पटियाल और लैफ्टिनैंट कर्नल केसी शर्मा ने श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव के श्मशानघाट पर सेना के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 11 साल के बेटे अक्षित ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान पूरा आसमान भारत माता की जय और विशम्बर सिंह अमर रहे के नारों से गूंज उठा।  एक ही परिवार के दो बेटों के इस तरह चले जाने से पूरे क्षेत्र में मातम  पसरा हुआ है।

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