Edited By Kuldeep, Updated: 03 Jun, 2026 10:23 PM

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
शिमला (प्रीति): शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि सरकार स्नातक डिग्री पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रैंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा कॉलेज स्तर पर विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की भी योजना है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए कक्षा 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है।
साथ ही उन्होंने बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने और अनुपालना न होने की स्थिति में वेतन कटौती जैसे कदमों पर भी बल दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 714 पीजीटी. तथा 102 डीपीई पदों के लिए एलडीआर प्रक्रिया शीघ्र आरम्भ की जाएगी। कम्प्यूटर शिक्षकों के मामलों में आवश्यक नियम संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे गए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम (बीवॉक) सफल रहा है। इसी को देखते हुए सरकार इस योजना के अंतर्गत चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है।शिक्षा मंत्री ने सभी ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर दिसम्बर माह में परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
टैबलेट वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश
शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण की समीक्षा करते हुए विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी लाने तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने उपनिदेशकों को निर्देश देते हुए कहा कि उपलब्ध करवाई गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने डा. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना की भी समीक्षा की। इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज की दर से 20 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने इस योजना की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के निर्देश दिए।