Shimla: प्रमोशन के लिए एक बार विकल्प चुनने के बाद कर्मचारी उससे पीछे नहीं हट सकते : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 27 Jul, 2026 09:59 PM

shimla promotion employees

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी पद पर प्रमोशन के लिए एक से अधिक चैनल उपलब्ध हैं और कर्मचारी ने स्वेच्छा से एक विकल्प चुन लिया है, तो वह बाद में उससे पीछे नहीं हट सकता।

शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी पद पर प्रमोशन के लिए एक से अधिक चैनल उपलब्ध हैं और कर्मचारी ने स्वेच्छा से एक विकल्प चुन लिया है, तो वह बाद में उससे पीछे नहीं हट सकता। भले ही नई नियमावली में दूसरे चैनल में बेहतर अवसर आ गए हों, कर्मचारी अपने पुराने विकल्प को बदलकर दूसरे चैनल से प्रमोशन का दावा नहीं कर सकता। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने मदन सिंह ठाकुर द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी। याचिकाकर्त्ता पहले क्लर्क के रूप में भर्ती हुए थे और बाद में सीनियर असिस्टैंट बने। वर्ष 2009 में, सरकार की मंजूरी के बाद उन्हें एडहॉक (तदर्थ) आधार पर तहसील कल्याण अधिकारी के पद पर प्रमोट किया गया।

जब याचिकाकर्त्ताओं को तहसील कल्याण अधिकारी बनाया गया था, तब इस पद से बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रमोशन का कोई कोटा नहीं था। लेकिन जनवरी 2012 में नियमों में संशोधन किया गया, जिसके तहत सीडीपीओ के पदों पर प्रमोशन के लिए सीनियर असिस्टैंट को 25 प्रतिशत और तहसील कल्याण अधिकारी को 20 प्रतिशत कोटा तय कर दिया गया। याचिकाकर्त्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई कि वे एडहॉक आधार पर तहसील कल्याण अधिकारी बने थे, इसलिए मूल पद (सीनियर असिस्टैंट) पर उनका 'लियन' (धारणाधिकार) बरकरार है। इस आधार पर उन्होंने मांग की कि उन्हें सीनियर असिस्टैंट की वरिष्ठता सूची के तहत सीडीपीओ पद पर प्रमोट किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि सरकारी निर्देशों (पैरा 16.26) के अनुसार, यदि प्रमोशन के लिए एक से अधिक रास्ते हैं, तो कर्मचारी से विकल्प लेना अनिवार्य है और एक बार चुना गया विकल्प वापस नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने माना कि भले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार एडहॉक प्रमोशन पर रहने के दौरान पुराने पद पर लियन रहता है, लेकिन विकल्प का नियम इस मामले में अलग है।

याचिकाकर्त्ताओं ने खुद लिखित सहमति देकर तहसील कल्याण अधिकारी का पद चुना था और इस पद के लाभ उठा रहे हैं। वे अब यह शिकायत नहीं कर सकते कि सीनियर असिस्टैंट पद पर रहने वाले उनके जूनियरों को संशोधित नियमों के तहत सीडीपीओ बना दिया गया। हाईकोर्ट ने पूर्व में 'नीलम कौशल बनाम हिमाचल राज्य' मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया और याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया।

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