Shimla: पर्याप्त मशीनरी तैनात न करने और सुस्ती बरतने पर डीसी किन्नौर हाईकोर्ट तलब

Edited By Kuldeep, Updated: 15 Jul, 2026 09:51 PM

shimla dc high court

प्रदेश उच्च न्यायालय ने किन्नौर जिले में आई फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) और मलबे के कारण पुल के डूबने व रिहायशी इमारतों को पैदा हुए खतरे पर कड़ा रुख अपनाया है।

शिमला (मनोहर): प्रदेश उच्च न्यायालय ने किन्नौर जिले में आई फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) और मलबे के कारण पुल के डूबने व रिहायशी इमारतों को पैदा हुए खतरे पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पिछले आदेशों के बावजूद पर्याप्त मशीनरी तैनात न करने और सुस्ती बरतने पर नाराजगी जताते हुए डीसी किन्नौर को निजी तौर पर कोर्ट में तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किए। यह मामला 'तैती खड्ड' के मूल प्रवाह को बहाल करने और वहां जमा मलबे व बोल्डर को हटाने से जुड़ा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने कोर्ट के समक्ष 9 और 10 जुलाई 2026 को आई फ्लैश फ्लड की तस्वीरें पेश कीं। इनसे साफ जाहिर होता है कि खड्ड में जमा मलबे की वजह से वहां का पुल पूरी तरह डूब चुका है और आसपास की इमारतों पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कोर्ट ने पाया कि अक्तूबर 2025 में ही जिला प्रशासन को ज्यादा मशीनें तैनात करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन हालिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि सितम्बर 2025 में सिर्फ एक पोकलेन मशीन को महज 40 घंटों के लिए काम पर लगाया गया था।

कोर्ट ने इसे अपने आदेशों की सीधे तौर पर अवहेलना माना है। लोक निर्माण विभाग रामपुर सर्कल के अधीक्षण अभियंता द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, खड्ड के बैड को करीब 3 मीटर गहरा करने और ड्रेजिंग के लिए 1.25 करोड़ का अनुमानित बजट तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा गया है। हाईकोर्ट ने डीसी किन्नौर को सख्त हिदायत दी है कि वे 28 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर रहें। उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा कि मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद नाले को साफ करने के लिए पर्याप्त मशीनें क्यों नहीं लगाई गईं।

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