Edited By Kuldeep, Updated: 02 Nov, 2026 04:27 PM

हिमाचल प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा के पास राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं बचा है।
शिमला (राक्टा): हिमाचल प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा के पास राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसी बौखलाहट का परिणाम है कि भाजपा को अपने स्थानीय नेताओं के बजाय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को प्रदर्शन के लिए शिमला बुलाना पड़ा। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने सोमवार को राज्य सचिवालय में मीडिया से यह बात कही। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में असम के मुख्यमंत्री के शिमला दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल देवभूमि है और पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण राज्य है, इसलिए मुख्यमंत्री के तौर पर उनका स्वागत है।
लेकिन भाजपा नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें शिमला लाने के पीछे आखिर क्या उद्देश्य था। साथ ही चौहान ने असम के मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वह हिमाचल में राजनीति करने की बजाय अपने पड़ोसी राज्य मणिपुर के बिगड़ते हालात की भी सुध लें, जहां लंबे समय से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को इन गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। चौहान ने कहा कि वोट, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अब पूरे देश में आवाज उठ रही है।
इस आंदोलन को किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इसमें देश का भविष्य यानी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा अपने कार्यकर्त्ताओं को बड़े-बड़े झंडे थमाकर समानांतर प्रदर्शन खड़ा करने की नाकाम कोशिश कर रही है, ताकि लोकतंत्र बचाने के आंदोलन को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की जनता का मूड अब पूरी तरह बदल चुका है और इस तरह के बनावटी प्रयासों का कोई असर नहीं पड़ने वाला। इतिहास गवाह है कि जब जनता किसी बदलाव का मन बना लेती है, तो बड़ी से बड़ी सल्तनतें भी उसके सामने टिक नहीं पातीं।
रामलीला मैदान की भीड़ स्पष्ट संकेत
चौहान ने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में उमड़ी विशाल भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश का आम नागरिक लोकतंत्र और संविधान के भविष्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। आजादी के संघर्ष में देश के हर वर्ग का योगदान था, इसलिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने या अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनाने के प्रयास लंबे समय तक सफल नहीं होंगे।
सर्वे में भी भाजपा हिमाचल में साफ
नरेश चौहान ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा करवाए गए आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट से भी साफ हो चुका है कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार आगामी चुनाव में नहीं बनने होने वाली है। ऐसे में संबंधित सर्वे रिपोर्ट के बाद से ही भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके साथ ही चौहान ने पूछा कि प्रधानमंत्री द्वारा हिमाचल को 1500 करोड़ रुपए देने की जो घोषणा की गई थी, वह कब तक पूरी होगी।