Edited By Kuldeep, Updated: 26 Oct, 2026 04:24 PM

एचआरटीसी पैंशनरों ने अपनी लंबित वित्तीय मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार के साथ कई दौर की बातचीत तथा पत्राचार के बावजूद मांगें पूरी न होने से नाराज पैंशनर 3 नवम्बर से परिवार सहित निगम मुख्यालय का...
शिमला (राजेश): एचआरटीसी पैंशनरों ने अपनी लंबित वित्तीय मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार के साथ कई दौर की बातचीत तथा पत्राचार के बावजूद मांगें पूरी न होने से नाराज पैंशनर 3 नवम्बर से परिवार सहित निगम मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे। एचआरटीसी पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। समिति के अनुसार पैंशनरों ने अपने लंबित वित्तीय लाभों की अदायगी के लिए निगम प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों, परिवहन मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री तक कई बार अपनी बात पहुंचाई, लेकिन अब तक अधिकांश मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। समिति ने बताया कि 23 अक्तूबर को निगम प्रबंधन के साथ हुई वार्ता में तत्कालीन प्रबंध निदेशक शुभम प्रताप सिंह ने 27 अक्तूबर को अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन के साथ मांगों पर चर्चा कर स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया था।
लेकिन हैरानी की बात है कि दूसरे दिन एमडी का तबादला हो गया। हालांकि प्रदेश सरकार ने शुभम प्रताप सिंह के स्थान पर राहुल कुमार को निगम का नया प्रबंध निदेशक नियुक्त कर दिया, लेकिन अब कितनी बार प्रबंध निदेशक से अपनी बात रखेंगे। पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने नए प्रबंध निदेशक राहुल कुमार की नियुक्ति का स्वागत करते हुए उनसे लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करने और समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपेक्षा जताई है। समिति ने याद दिलाया कि पैंशनर 13 अक्तूबर को ही निगम मुख्यालय के घेराव का नोटिस दे चुके हैं।
अब आश्वासन नहीं, ठोस फैसला चाहते हैं पैंशनर
समिति के सचिव राजेन्द्र ठाकुर, मीडिया प्रभारी बृज लाल ठाकुर और सदस्यों केसी चौहान, देवराज ठाकुर, अजमेर ठाकुर, रूप चंद शर्मा, सुरेन्द्र गौतम, नानक शांडिल, अशोक पराशर और बलवीर सिंह ने संयुक्त बयान में कहा कि पैंशनरों की समस्याओं का समाधान करना अब प्रदेश सरकार के साथ-साथ निवर्तमान प्रबंध निदेशक शुभम प्रताप सिंह और नवनियुक्त प्रबंध निदेशक राहुल कुमार की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें आश्वासन नहीं ठोस फैसला चाहिए। समिति ने स्पष्ट किया कि पैंशनरों ने अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक बातचीत और इंतजार का रास्ता अपनाया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में 3 नवम्बर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन घेराव का निर्णय मजबूरी में लिया गया है।