Shimla: अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलना कोई नियमित भर्ती का जरिया नहीं : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 26 Oct, 2026 11:13 PM

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हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलना कोई नियमित भर्ती का जरिया नहीं है, बल्कि यह परिवार को अचानक आए संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली एक सीमित राहत है।

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट किया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलना कोई नियमित भर्ती का जरिया नहीं है, बल्कि यह परिवार को अचानक आए संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली एक सीमित राहत है। एक बार बिना किसी विरोध के नौकरी स्वीकार कर लेने के बाद कर्मचारी को अपनी मर्जी से पद की स्थिति या नाम को काॅन्ट्रैक्ट से रैगुलर में बदलने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रह जाता। यह फैसला न्यायाधीश रंजन शर्मा ने जनक दुलारी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।

याचिकाकर्त्ता जनक दुलारी के पति राम स्वरूप श्रीमाली पुलिस विभाग में सेवा के दौरान लापता हो गए थे, जिसके बाद उनका सेवाकाल समाप्त मान लिया गया। परिवार को अचानक आए इस वित्तीय संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने जनक दुलारी को 23 जून, 2007 को महानिदेशक पुलिस कार्यालय शिमला में अनुकंपा के आधार पर अनुबंध पर क्लर्क नियुक्त किया था। जनक दुलारी ने साल 2013 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मांग की थी कि विभाग के साल 2012 के उस आदेश को रद्द किया जाए, जिसने उनकी नौकरी को नियुक्ति की तारीख (2007) से काॅन्ट्रैक्ट की बजाय नियमित करने की अर्जी खारिज कर दी थी।

उन्होंने दलील दी थी कि विभाग में अन्य कई आश्रितों को नियमित पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव न किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति मिलने के साथ ही संकट का समय समाप्त माना जाता है। इसके बाद कर्मचारी को भी एक सामान्य कर्मचारी की तरह ही अपने करियर में आगे बढ़ना होगा, उसे किसी विशेष दर्जे या 'असीमित करुणा' का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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