Shimla: बरी होना ही हर्जाने का आधार नहीं, द्वेषपूर्ण अभियोजन साबित करना जरूरी : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 10 Sep, 2026 08:30 PM

shimla high court

हाईकोर्ट ने द्वेषपूर्ण अभियोजन और मानहानि के मुकद्दमों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फौजदारी (क्रिमिनल) मामले में केवल बरी हो जाने मात्र से ही किसी व्यक्ति को शिकायतकर्त्ता के खिलाफ द्वेषपूर्ण अभियोजन के तहत हर्जाना...

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने द्वेषपूर्ण अभियोजन और मानहानि के मुकद्दमों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फौजदारी (क्रिमिनल) मामले में केवल बरी हो जाने मात्र से ही किसी व्यक्ति को शिकायतकर्त्ता के खिलाफ द्वेषपूर्ण अभियोजन के तहत हर्जाना पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। दीवानी (सिविल) कोर्ट में हर्जाना पाने के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि क्रिमिनल शिकायत पूरी तरह से बिना किसी उचित और संभावित कारण के केवल दुर्भावना या रंजिश के तहत दर्ज करवाई गई थी।

न्यायाधीश सुशील कुकरेजा ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी। मामले के अनुसार शिकायतकर्त्ता ने अपीलकर्त्ताओं के खिलाफ सिरमौर जिले के पच्छाद थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई। इसमें आरोप था कि आरोपियों ने उसकी जमीन पर जबरन कब्जा और अतिक्रमण किया है, जिसके तहत आईपीसी और एससी /एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज हुआ।

विशेष न्यायाधीश सिरमौर ने सुनवाई के बाद आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए क्रिमिनल केस से बरी कर दिया। बरी होने के बाद, उन व्यक्तियों ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने और अदालती खर्चों का हवाला देकर शिकायतकर्त्ता के खिलाफ 10,10,000 रुपए के हर्जाने का सिविल मुकद्दमा दायर कर दिया। जिला न्यायाधीश, सिरमौर (नाहन) ने भी हर्जाने के इस दावे को खारिज कर दिया था।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!