Edited By Kuldeep, Updated: 09 Sep, 2026 09:03 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सदस्यों के पद खाली होने के कारण पैदा हुए संकट पर कड़ा संज्ञान लिया है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सदस्यों के पद खाली होने के कारण पैदा हुए संकट पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक यह बताए कि इन महत्वपूर्ण पदों को कब तक भरा जाएगा। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने कुलदीप महरोल द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के पश्चात यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्त्ता की ओर से दलील दी गई कि आयोग के क्रियाशील न होने से आरटीआई आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विभिन्न सरकारी विभागों के जन सूचना अधिकारियों के आदेशों को चुनौती देने के लिए राज्य में कोई अपीलीय प्राधिकारी ही उपलब्ध नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्त्ता के मौखिक अनुरोध पर हाईकोर्ट ने सरकार (मुख्य सचिव के माध्यम से) को इस मामले में प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य सूचना आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आयुक्तों की अनुपस्थिति के कारण कानूनन अपील दायर करने का अधिकार रखने वाले नागरिकों को उनके इस बहुमूल्य वैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि इस गंभीर मुद्दे को राज्य के मुख्य सचिव के समक्ष उठाएं। सरकार को 14 सितम्बर को या उससे पहले अदालत को यह स्पष्ट करना होगा कि आयोग के रिक्त पदों को किस निश्चित समय-सीमा के भीतर भर दिया जाएगा।