Edited By Kuldeep, Updated: 02 Aug, 2026 06:50 PM

पंजाब के साथ लगते बार्डर जिला ऊना में क्या फिर से फिरौती माफिया सक्रिय होने लगा है? गत 2 वर्षों से प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऊना जिला में ही गैंगवार और मर्डर सामने आए थे।
शिमला (ब्यूरो): पंजाब के साथ लगते बार्डर जिला ऊना में क्या फिर से फिरौती माफिया सक्रिय होने लगा है? गत 2 वर्षों से प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऊना जिला में ही गैंगवार और मर्डर सामने आए थे। पुलिस ने ज्यों-ज्यों जांच की त्यों-त्यों पता लगा कि पंजाब की जेलों में बैठे जिला ऊना के ही गैंगस्टर पर्दे के पीछे खेल खेल रहे थे। चाहे ऊना-अम्ब नैशनल हाइवे पर अप्पर बसाल के ख्वाजा में एक युवक का उस समय मर्डर कर दिया गया जब वह बार्बर शॉप में था। पुलिस की जांच चली तो इंटरस्टेट गैंग पकड़ी गई और उनका मास्टरमाइंड एक गैंगस्टर निकला। पुलिस उसे पंजाब की जेल से हिमाचल तो ले आई लेकिन उसकी गतिविधियां पूरी तरह से थमी नहीं हैं।
जिला मुख्यालय ऊना के निकट लाल सिंगी में दूसरा मर्डर 19 नवम्बर, 2025 को हुआ जब 2 गुट आमने-सामने टकराए। दोनों का संबंध कहीं न कहीं खनन से जुड़ा हुआ था। इस हाई प्रोफाइल मामले में 3 पर मर्डर के आरोप तो करीब 6 युवक हत्या के प्रयास में नामजद हुए। पूरे प्रदेश में हल्ला मचा, पुलिस ने कई पाबंदियां लगाई, प्रशासन ने सभी लाइसैंसी हथियार तक वापस मंगवा लिए। अनेक प्रकार के कदम उठाए गए लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई तो पाबंदियां भी खत्म हुई।
तेजी से विकसित हो रहे जिला ऊना में जिस प्रकार से पुलिस ने फिरौती माफिया को डि-कोड किया और खुफिया विभाग ने सूचनाएं जुटाई तो वह हैरानीजनक निकली। चाहे देहलां-बहडाला में अवैध रिवॉल्वर मिलने का मामला हो या फिर देसी कट्टों के साथ पकड़े गए पंजाब के युवा हों। इससे पहले हरोली क्षेत्र के सलोह-घालूवाल में एक व्यक्ति पर गोलियां चली और उसके पीछे भी गैंगवार नजर आया। यहां तक कि जिला जेल वनगढ़ में भी कैदियों के बीच हिंसक भिड़ंत हुई जिसके बाद कुछ कैदियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया गया। अनेक मामलों ने राज्य की पुलिस के कान खड़े कर दिए। एक के बाद एक एस.पी. बदले गए।
पुलिस के खुफिया विंग की मानें तो एक बार फिर से ऊना में जेलों में बैठे कैदी सक्रिय होने लगे हैं। ऐसे कई युवा अभी भी जिला में सक्रिय हैं जो कैदियों के साथ जेलों में लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। गैंगस्टरों के गुर्गे और उनके हैंडलर बाकायदा जिला में खनन और दूसरे मुद्दों से जुड़े मामलों में दखल दे रहे हैं। समझौते करवाए जा रहे हैं। खुफिया इनपुट की बात मानें तो समझौतों की एवज में काफी राशि ली जा रही है। कुछेक व्यापारी सुरक्षित महसूस करने के लिए फिरौती दे रहे हैं। यह सारा कार्य सुनियोजित ढंग से चल रहा है और व्यापारी इसलिए सामने नहीं आ रहे हैं क्योंकि उन्हें कई खतरे हैं।
जिला के ही संतोषगढ़ कस्बे के एक प्रोफैशनल से फिरौती मांगी गई थी। जब पुलिस में शिकायत हुई, पुलिस ने जाल बिछाया तो फिरौती लेने वाले पंजाब के युवकों को रंगे हाथों पकड़ा गया। हालांकि वह केवल आगे गुर्गे थे और उनके हैंडलर पीछे छुपे हुए हैं। इन पर अभी तक भी हाथ नहीं पड़े हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दुबई तो कुछ दूसरे देशों में पहुंचे हैं और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। उन पर ऊना पुलिस ने कई मामलों में नामजद किया हुआ है।
पुलिस की अपनी मजबूरियां हैं। शिकायतकर्ता को ढंूढना और व्हटसएप कॉल, खासकर विभिन्न एप्स के जरिए विदेशी नम्बरों से आ रही कॉल्स का पता लगाना काफी मुश्किल हो रहा है। कोई शिकायतकर्ता इसलिए सामने नहीं आ रहा है क्योंकि वह भयभीत हैं। एक तरीके से गैंगस्टर जेल से साम्राज्य चला रहे हैं। वाकायदा कुछ युवा जेलों में जाकर मैसेज मैनेज कर रहे हैं। प्रदेश के जिला ऊना में यह धंधा तब से पनपा है जब यहां खनन का कारोबार बढ़ा है और कुछ गैंगस्टर जेलों में पहुंचे हैं। जेलों को यह गैंगस्टर हैवन यानी स्वर्ग मान रहे हैं। हालांकि पुलिस इस नैटवर्क को ध्वस्त करना चाहती है परन्तु पर्याप्त साक्ष्य और डायरेक्टर शिकायतकत्र्ताओं की कमी है। विदेशी नम्बरों के जरिए यह खेल खेला जा रहा है।