Shimla: सस्ते राशन में बड़ा हेरफेर, डिपुओं तक पहुंचते 6 से 8 किलो राशन हो रहा गायब

Edited By Kuldeep, Updated: 10 Jun, 2026 07:48 PM

shimla depot ration missing

सस्ते राशन के डिपुओं में निगम के गोदामों से पूरा राशन डिपुओं तक नहीं पहुंच रहा है। डिपुओं तक राशन की सप्लाई पहुुंचते 6 से 8 किलो राशन गायब हो रहा है।

शिमला (राजेश): सस्ते राशन के डिपुओं में निगम के गोदामों से पूरा राशन डिपुओं तक नहीं पहुंच रहा है। डिपुओं तक राशन की सप्लाई पहुुंचते 6 से 8 किलो राशन गायब हो रहा है। जब डिपो संचालक उनका मशीनों पर तोल करते हैं तो किसी में 1, किसी में 2 किलो तो किसी में 6 से 8 किलो तक राशन कम आ रहा है। स्थिति यह है कि डिपो धारकों को राशन कार्ड धारकों को राशन पूरा करना मुश्किल हो रहा है। चावल की बोरी 50 किलो 580 ग्राम की होती है जिसमें चावल 43 से 48 किलो आ रहा है। डिपो धारक अपने डिपो पर दर्ज राशन कार्डों के मुताबिक खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को हर माह डिमांड देते हैं और विभाग डिपो धारकों की मांग के अनुसार डिपो धारकों के राशन का परमिट काटता है।

डिपो धारकों को यह राशन खाद्य आपूर्ति विभाग उनके परमिट के हिसाब से मुहैया करवाता है जिसकी सारी की सारी रकम एक-एक ग्राम के हिसाब से डिपो धारक निगम को एडवांस में अदा करते हैं, लेकिन निगम के गोदामों से डिपो धारकों को परमिट के हिसाब से राशन न देकर कम राशन मिल रहा है। इस बात का खुलासा प्रदेश के डिपो संचालक समिति के अध्यक्ष अशोक कवि व पदाधिकारियों ने किया। यही नहीं समिति ने गोदामों से आए राशन का तोल भी प्रदेश के विभिन्न डिपुओं में करवाया है जिसमें पाया गया कि किसी एक जिला में नहीं प्रदेश के अधिकतर जिलों में राशन कम पाया जा रहा है।

कई बार विभाग को करवाया जा चुका अवगत, लेकिन नहीं कार्रवाई : कवि
प्रदेश डिपो संचालक समिति के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि ने आरोप लगाते हुए कहा कि इसके बारे में कई बार विभाग को अवगत करवाया, लेकिन खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के खिलाफ विभाग ने कोई भी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के खिलाफ न तो खाद्य आपूर्ति विभाग और न ही मापतोल विभाग कोई कार्रवाई करता है जबकि खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी डिपो धारकों से निरीक्षण के दौरान निगम द्वारा कागजों में भेजे गए एक-एक ग्राम राशन का हिसाब मांगते हैं और मापतोल विभाग भी डिपो पर कम आए राशन पर डिपो धारकों का मोटा चालान कर देते हैं, लेकिन मापतोल विभाग न तो आटे की मिलों पर जाकर आटे का वजन चैक करते हैं और न ही निगम के गोदामों में चावल, चीनी और खाद्य तेल की पेटियों का वजन चैक किया जाता है।                                                      

सरसों की तेल की पेटी में 12 लीटर के बजाय 11 लीटर ही तेल
समिति ने निगम पर यह भी आरोप लगाया कि निगम के गोदामों से डिपुओं पर भेजी गई खाद्य तेल की पेटियों में भी 12 लीटर के बजाय 11 लीटर खाद्य तेल ही निकलता है जिसकी शिकायत भी कई बार खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग व खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों से की, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

मुख्यमंत्री के पास खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग लेकिन फिर भी नहीं कोई सुनवाई
डिपो संचालकों ने कहा कि जब खाद्य आपूर्ति विभाग व खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों से कम राशन की शिकायत की जाती है तो जवाब मिलता है कि आपकी बेइंग मशीन खराब है जबकि यह मशीनें डिपुओं पर विभाग द्वारा स्थापित की गई हैं और मापतोल विभाग द्वारा सत्यापित की जाती हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग माननीय मुख्यमंत्री के पास है बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है।

सरकार ने नहीं किया अपना वायदा पूरा, इससे भी खफा प्रदेश के 5 हजार डिपो संचालक
आम विधानसभा चुनावों से पूर्व कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने पर डिपो धारकों को 20 हज़ार मासिक वेतन देने का वायदा किया था और इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र की क्रम संख्या 14 पर अंकित भी किया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार अपना वायदा पूरा नहीं कर पाई। राज्य अध्यक्ष ने कहा कि विभाग व सरकार ने समय रहते कोई उचित कदम नहीं उठाया तो डिपो धारक डिपो छोड़ने पर मजबूर होंगे।

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