Edited By Kuldeep, Updated: 02 Jul, 2026 07:17 PM

हिमाचल सरकार शिक्षा के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की बैस्ट प्रैक्टिसस को एडॉप्ट करेगी। कश्मीर दौरे से लौटे शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्कूलों की ऑनलाइन इंस्पैक्शन की जाती है।
शिमला (प्रीति): हिमाचल सरकार शिक्षा के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की बैस्ट प्रैक्टिसस को एडॉप्ट करेगी। कश्मीर दौरे से लौटे शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्कूलों की ऑनलाइन इंस्पैक्शन की जाती है। साथ ही वहां दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों लिए सीआरसी के तहत एक वर्ष की नियुक्ति की जाती है। समग्र शिक्षा के तहत यह नियुक्ति होती है। वहां विद्या समीक्षा केंद्र की निगरानी के लिए जिला इकाइयों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की कुछेक प्रैक्टिसस बहुत बेहतर है, जिसे प्रदेश में भी शुरू किया जा सकता है। इसके लिए स्कूल शिक्षा निदेशक को डिटेल रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान प्रदेश की बैस्ट प्रैक्टिसस के बारे में भी जम्मू-कश्मीर सरकार को अवगत करवाया गया, जिसे उन्होंने सराहा है।
150 सीबीएसई स्कूलों में जल्द प्रधानाचार्यों को मिलेगी नियुक्ति
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही 150 सीबीएसई स्कूलों में प्रधानाचार्यों को नियुक्त करेगी। इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसकी सूची भी तैयार है। 90 प्रतिशत से अधिक प्रधानाचार्यों ने स्टेशन के लिए विकल्प भी दे दिए हैं। इसके साथ ही इन स्कूलों में मैरिट के आधार पर शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिन्होंने टैस्ट पास किए हैं। मामले पर बीते बुधवार को सब कमेटी की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई है और इसकी पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
1600 स्कूलों में बढ़ी इनरोलमैंट, जरूरत पड़ने पर रखे जाएंगे अतिरिक्त शिक्षक
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के 1600 स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में इन स्कूलों में जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शिक्षक रखे जाएंगे। सीबीएसई स्कूलों में पहले मैरिट में आने वाले शिक्षकों को नियुक्ति दी जाएगी। इसके बाद यहां जरूरत के आधार पर अतिरिक्त शिक्षक रखे जाएंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पॉलिसी के तहत स्कूल मर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दो किलोमीटर के दायरे में पांच से कम छात्रों वाले प्राथमिक विद्यालयों का विलय किया गया है, जबकि मिडल स्कूलों के लिए पांच छात्र और तीन किलोमीटर का मानदंड रखा गया है। प्रदेश में 35 ऐसे स्कूल भी थे जिनमें नामांकन शून्य था, जिन्हें बंद किया गया है।