Edited By Kuldeep, Updated: 07 Jul, 2026 09:44 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने उन असिस्टैंट स्टाफ नर्सों को फिलहाल तैनाती देने से मना कर दिया, जिनका हाल ही में परिणाम घोषित किया गया है।
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने उन असिस्टैंट स्टाफ नर्सों को फिलहाल तैनाती देने से मना कर दिया, जिनका हाल ही में परिणाम घोषित किया गया है। न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की मांग को ठुकरा दिया कि प्रदेश में काफी स्टाफ नर्सों के पद रिक्त पड़े हैं, इस कारण उन्हें इन असिस्टैंट स्टाफ नर्सों को तैनाती देने की अनुमति प्रदान की जाए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुनः शपथ पत्र के माध्यम से यह जानकारी देने के आदेश जारी किए हैं कि पूरे प्रदेश में विभागों, निगमों व बोर्डों में कितने कर्मचारी बतौर आऊटसोर्स भर्ती किए गए हैं।
हाईकोर्ट के समक्ष दायर किए गए शपथ पत्र में पूरी जानकारी न होने के कारण कोर्ट ने राज्य सरकार को शपथ पत्र के माध्यम से पूरी जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं। फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के चलते आऊटसोर्स के पदों पर भर्ती बाबत प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से कोई नया स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया है। पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि स्वास्थ्य विभाग में पहले तो लोगों को आऊटसोर्स आधार पर नियुक्त किया जाता है और उसके बाद रोगी कल्याण समिति में समाहित कर लिया जाता है।
इस प्रकार अधिकारियों द्वारा अज्ञात उद्देश्यों के लिए आऊटसोर्स भर्तियों के रूप में एक गुप्त मार्ग खोला गया है। कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि उसके पास यह पूरी जानकारी नहीं है कि प्रदेश सरकार सहित अन्य उपक्रमों में कितने आऊटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार में स्वास्थ्य सचिव सहित वित्त सचिव को स्पष्टीकरण हेतु कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश दिए थे। मामले पर आगामी सुनवाई 22 जुलाई के लिए निर्धारित की गई है।