Edited By Vijay, Updated: 06 Aug, 2026 11:39 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार ने कर्ज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से वर्ष 2022 तक सभी सरकारों ने कुल 69,500 करोड़ रुपए कर्ज लिया, जबकि व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने...
शिमला (ब्यूरो): पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार ने कर्ज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से वर्ष 2022 तक सभी सरकारों ने कुल 69,500 करोड़ रुपए कर्ज लिया, जबकि व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने वाली मौजूदा सरकार ने अकेले अपने 4 वर्ष के कार्यकाल में ही 45,000 करोड़ रुपए का ऋण लिया है। यदि सरकार 1 साल और सत्ता में रही तो यह आंकड़ा 60,000 करोड़ रुपए पार हो जाएगा। जयराम ठाकुर शिमला में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार की तरफ से जनहित में खोले गए लगभग 2 हजार संस्थानों को बंद कर दिया है।
केवल सत्तासीन कांग्रेस पार्टी का नहीं है हिमाचल
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल सत्तासीन कांग्रेस पार्टी का नहीं है, बल्कि इसकी चिंता हर हिमाचली और भाजपा को भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य लाभ देने का दावा करने वाली सरकार के समय में इलाज में 1 वर्ष और जांच के लिए 1 महीने का समय मिल रहा है। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने का स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने भाजपा में गुटबाजी के दावों को खारिज करते हुए कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और संगठन ही भूमिकाएं तय करता है। इसके विपरीत कांग्रेस में अनगिनत गुट हैं, जिसका नतीजा हालिया निकाय और पंचायती राज चुनाव में देखने को मिला। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों में भाजपा के 70 फीसदी से अधिक जनप्रतिनिधि जीते हैं।
10 गारंटियों का इंतजार कर रही जनता, अब हर वायदे का हिसाब होगा : बिंदल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि चुनाव से पहले 10 गारंटियों के नाम पर हिमाचल की जनता से वोट लेने वाली कांग्रेस सरकार से आज जनता हिसाब मांग रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए देने, 300 यूनिट फ्री बिजली देने और हर वर्ष 1 लाख पक्की सरकारी नौकरी देने का वायदा किया था, जो झूठा निकाला। ऐसा करके कांग्रेस ने प्रदेश की जनता से विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों, पैंशनरों, किसानों, बागवानों और हर वर्ग से बड़े-बड़े वायदे किए गए थे। महंगाई कम करने, व्यवस्था सुधारने और आर्थिक राहत देने की बातें की गईं, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।
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