Edited By Kuldeep, Updated: 28 Jul, 2026 05:05 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि हमारी सरकार में पेपर लीक नहीं हुआ।
शिमला (ब्यूरो): पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि हमारी सरकार में पेपर लीक नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की जनता सरकार से पूछ रही है कि उन्होंने कितने पेपर करवाए हैं? प्री-नर्सरी टीचर की भर्ती हो रही थी, जिसका पूरा पैसा केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है। उसमें धड़ल्ले से भ्रष्टाचार हुआ। विरोध के बाद भर्ती रोकी गई, जिसकी वजह से मासूम बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई। सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। सरकार के फिनायल बेचने वाले मित्रों ने चिकित्सा अधिकारी और नर्स की भर्ती के लिए आऊटसोर्स कंपनियां बनाई, जिस पर न्यायालय ने भी बेहद तल्ख टिप्पणी की। कई बार उन भर्तियों पर रोक लगी। इसका पैसा भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार ही देती है।
उनके मंत्री खुलेआम मंचों से खड़े होकर बताते हैं कि उन्होंने अपने हलके के कितने लोगों को सिफारिशी नौकरी लगवाई है और मुख्यमंत्री पेपर लीक की बात करते हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि इसी तरह हाल ही में हुई पुलिस भर्ती में मास चीटिंग के आरोप परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों ने लगाए। परीक्षा के बाद प्रदेश पुलिस द्वारा की गई कई कार्रवाइयों में पेपर बेचने और खरीदने वाले आरोपी भी पकड़े गए। उनसे मिली सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने आगे भी कार्रवाई की। लेन-देन का रिकॉर्ड ही नहीं, भारी मात्रा में कैश भी बरामद हुआ। इतने गंभीर आरोप के बाद भी सरकार ने चुप्पी साध ली। जांच को रोक दिया। इसी तरह हमारी सरकार के समय हुई पुलिस भर्ती में पेपर लीक की जानकारी हुई। हमने तत्काल मुकद्दमा दर्ज कर सख्त से सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
एसआईटी का गठन किया और मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति की। तुरंत परीक्षा रद्द की। इन सबके बीच सरकार बदल गई और व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार सत्ता में आई। इसी दौरान सीबीआई ने भी अपनी जांच पूरी की और कुछ पुलिस अधिकारियों को इस पेपर लीक का दोषी माना तथा उनके खिलाफ कार्रवाई करने की संस्तुति की। हैरानी की बात है कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले मुख्यमंत्री उस रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठ गए। दो साल तक यह फाइल दबी रही। लेकिन सच सामने आ ही जाता है। कुछ लोगों ने उस जांच रिपोर्ट को लीक किया, जिसके बाद इस सरकार का असली चेहरा उजागर हुआ।