Edited By Vijay, Updated: 23 Jul, 2026 09:43 PM

पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सख्त नीति की सराहना करते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
शिमला (ब्यूरो): पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सख्त नीति की सराहना करते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने राज्य सरकार पर पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में लीपापोती करने और दोषियों को बचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिमला से जारी एक प्रैस बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध पर पूरे देश को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कड़ा रुख देश के करोड़ों युवाओं के हितों की रक्षा करने के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
जयराम ठाकुर ने राज्य की कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि हिमाचल में सरकार का रवैया केंद्र के बिल्कुल विपरीत रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के स्पष्ट साक्ष्य सामने आ चुके थे, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने उसे पेपर लीक मानने से ही साफ इंकार कर दिया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने खुद सामने आकर सामूहिक नकल होने के आरोप लगाए, तब भी सरकार ने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। उन्होंने सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा इस मामले में कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने उस जांच रिपोर्ट को ही दबा दिया। हद तो यह है कि जिन अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी, उन्हें दंडित करने के बजाय महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी गईं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व पर निशाना साधते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि यदि कांग्रेस की नीयत वास्तव में साफ होती, तो वे पेपर लीक जैसे गंभीर और राष्ट्रीय महत्व के विषय पर संसद में चर्चा करते। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि भाजपा का दृढ़ता से मानना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े ऐसे संवेदनशील विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि सदन के भीतर इस पर गंभीर चर्चा कर कोई ठोस समाधान निकाला जाना चाहिए।
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