Edited By Vijay, Updated: 29 Jul, 2026 07:29 PM

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इस बार मानसून की बारिश भारी तबाही लेकर आई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण पूरे जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
धर्मशाला (सुनील): हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इस बार मानसून की बारिश भारी तबाही लेकर आई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण पूरे जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अब तक जिले में करीब 128 करोड़ रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति का भारी नुक्सान आंका गया है।आपदा के इस दौर में सरकारी महकमों का बुनियादी ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है। जिले में सबसे ज्यादा नुक्सान लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग को उठाना पड़ा है। कई प्रमुख सड़कें बह गई हैं और पेयजल योजनाएं ठप्प पड़ गई हैं, जिन्हें बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
कांगड़ा के डीसी हेमराज बैरवा ने नुक्सान के आधिकारिक आंकड़े सांझा करते हुए बताया कि इस मानसून सीजन में अब तक 33 पक्के मकान पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। वहीं, 39 घरों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। इसके अलावा बारिश और भूस्खलन की चपेट में आने से 39 मवेशियों की भी मौत हुई है। डीसी ने स्पष्ट किया कि आपदा की सबसे ज्यादा मार बोह वैली क्षेत्र पर पड़ी है। यहां कई परिवार अपने जीवन भर की पूंजी और आशियाना गंवा चुके हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं बोह वैली का दौरा किया था और प्रभावितों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है। प्रशासन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसारआपदा की घड़ी में प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा गया है। संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम और तहसीलदारों के माध्यम से पीड़ितों को तुरंत फौरी राहत राशि उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। वहीं मौसम विभाग द्वारा जारी यैलो अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने आम जनता के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर दी है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की ओर न जाएं और एडवाइजरी का सख्ती से पालन करें।
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