'यूं ही कोई प्रेम कुमार धूमल नहीं बन जाता', रिटायरमेंट के बाद पूर्व CM से मिलने पहुंचे करसोग के हिमा राम, भावुक होकर कही ये बात

Edited By Swati Sharma, Updated: 05 Jun, 2026 10:59 AM

hima ram from karsog went to meet former cm prem kumar dhumal

हमीरपुर (राजीव) : ऐसे अनेकों किस्से आज भी प्रदेश के कोने-कोने में आम जनमानस की जुबान पर हैं, जो जननायक प्रो. प्रेम कुमार धूमल  की संवेदनशीलता, सरलता और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं। करसोग के हिमा राम जब पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार...

हमीरपुर (राजीव) : ऐसे अनेकों किस्से आज भी प्रदेश के कोने-कोने में आम जनमानस की जुबान पर हैं, जो जननायक प्रो. प्रेम कुमार धूमल  की संवेदनशीलता, सरलता और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं। करसोग के हिमा राम जब पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के निवास स्थान पर पहुंचे, तो उन्होंने भावुक होकर अपने रोजगार की कहानी सुनाई।

हिमा राम ने बताया कि किस प्रकार सरकार की योजनाओं और सकारात्मक सोच ने उनके जीवन को नई दिशा दी और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया। जनता के सुख-दुख में सहभागी बनना, हर व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना ही एक सच्चे जननायक की पहचान होती है। यही कारण है कि वर्षों बाद भी लोग इन अनुभवों को सम्मान और गर्व के साथ याद करते हैं। राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता के दिलों में जो स्थान सेवा, संवेदनशीलता और विश्वास से बनता है, वह सदैव अमिट रहता है। वर्षो बाद मंडी जिले के करसोग विस क्षेत्र के गांव बनेर निवासी हेमा राम ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल से समीरपुर पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान हेमा राम बहुत भावुक हो गए और कहा कि धूमल की तरह कोई नही हो सकता।

'यूं ही कोई प्रेम कुमार धूमल नहीं बन जाता'

हेमा राम ने कहा कि यूं ही कोई प्रेम कुमार धूमल नहीं बन जाता, इसके लिए बड़ा दिल और दूरगामी सोच रखनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में वह अत्यंत गरीब परिस्थितियों से गुजर रहे थे। परिवार के पालन पोषण तक के लिए साधन नहीं थे। इसी मजबूरी में उन्होंने 16 अप्रैल 2001 को सचिवालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मुलाकात कर रोजगार की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या गंभीरता से सुनी और आश्वासन दिया कि समाधान किया जाएगा। कुछ समय बाद उन्हें आवश्यक दस्तावेज जमा करवाने के लिए कहा गया और मुख्यमंत्री ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें राजकीय प्राथमिक पाठशाला बनेर में जलवाहक (वाटर कैरियर) के पद पर नियुक्ति दिलवाई। 27 मार्च 2003 को उन्होंने सेवाएं शुरू कीं, वर्ष 2017 में नियमित हुए और 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।


'आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें धूमल का बड़ा योगदान'

हेमाराम ने कहा कि यदि उस समय उन्हें रोजगार न मिला होता तो उनका परिवार कठिन संकट में पड़ जाता। उन्होंने कहा कि धूमल के कार्यकाल में आम आदमी सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच सकता था। आज वह जो कुछ भी हैं, उसमें धूमल का बड़ा योगदान है और इसी कृतज्ञता भाव से वह उनका धन्यवाद करने पहुंचे हैं। 

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