Edited By Vijay, Updated: 30 Jul, 2026 06:23 PM

हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्रीय सिविल सेवा (लीव) नियम, 1972 में संशोधन करते हुए अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) से संबंधित नियमों में संशोधन किया है। वित्त विभाग की तरफ से इस आशय संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्रीय सिविल सेवा (लीव) नियम, 1972 में संशोधन करते हुए अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) से संबंधित नियमों में संशोधन किया है। वित्त विभाग की तरफ से इस आशय संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार यह संशोधन 7 अगस्त, 2024 से प्रभावी माना जाएगा। संशोधित नियम 56 के तहत अब राज्य के सरकारी कर्मचारियों को भारत अथवा विदेश में अध्ययन अवकाश के दौरान वही अवकाश वेतन मिलेगा, जो उन्हें अवकाश पर जाने से ठीक पहले ड्यूटी के दौरान प्राप्त हो रहा था। इसके साथ उन्हें महंगाई भत्ता (डीए) तथा नियमानुसार मकान किराया भत्ता (एचआरए) भी देय होगा।
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत में अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को एचआरए नियम 60 के प्रावधानों के अनुसार मिलेगा। इसके अतिरिक्त पूर्ण वेतन पर अध्ययन अवकाश का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को प्रमाणित करना होगा कि वह किसी प्रकार की स्कॉलरशिप, स्टाइपैंड या अंशकालिक रोजगार से पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर रहा है। यदि अध्ययन अवकाश के दौरान कर्मचारी को किसी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपैंड या अंशकालिक रोजगार से राशि प्राप्त होती है तो उस राशि का समायोजन अवकाश वेतन में किया जाएगा। हालांकि समायोजन के बाद भी कर्मचारी का अवकाश वेतन हाफ-पे लीव के दौरान मिलने वाले वेतन से कम नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने बजट में इसकी घोषणा की थी। इससे पहले अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को 40 फीसदी और महंगाई भत्ते के साथ आवास भत्ते का लाभ दिया जाता था। राज्य सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा और उन्नत व्यावसायिक कौशल प्राप्त करने से न केवल कर्मचारियों का व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और प्रभावशीलता भी बढ़ती है।
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