Edited By Vijay, Updated: 29 May, 2026 07:44 PM

शिमला नगर निगम की बैठक शुक्रवार को भारी हंगामे और हाई वोल्टेज ड्रामे की भेंट चढ़ गई। एस्मा लागू होने के बाद टर्मिनेट किए गए 41 सैहब कर्मचारियों की बहाली न होने से भड़के सीटू कार्यकर्ता और कर्मचारी जबरन निगम सदन (बचत भवन) के भीतर घुस गए। हालात बेकाबू...
शिमला (वंदना): शिमला नगर निगम की बैठक शुक्रवार को भारी हंगामे और हाई वोल्टेज ड्रामे की भेंट चढ़ गई। एस्मा लागू होने के बाद टर्मिनेट किए गए 41 सैहब कर्मचारियों की बहाली न होने से भड़के सीटू कार्यकर्ता और कर्मचारी जबरन निगम सदन (बचत भवन) के भीतर घुस गए। हालात बेकाबू होते देख भारी पुलिस बल बुलाना पड़ा, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को धक्के मारकर बाहर निकाला।
जानकारी के अनुसार सीटू के बैनर तले सैहब कर्मचारी शुक्रवार सुबह बचत भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे थे, लेकिन जैसे ही मेयर सुरेंद्र चौहान और निगम पार्षद सदन की कार्यवाही के लिए पहुंचे तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और जबरन हाऊस के अंदर घुस गए। अचानक हुए इस हंगामे से सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया और बैठक की कार्यवाही शुरू होने में काफी देरी हुई।
सदन के भीतर कर्मचारियों ने निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी शोर-शराबे के बीच मेयर सुरेंद्र चौहान ने कार्यवाही शुरू की। कार्यवाही में बाधा उत्पन्न होते देख मेयर ने कड़ा रुख अपनाया और तुरंत पुलिस को सीटू कार्यकर्ताओं को बाहर निकालने के आदेश दिए। मौके पर तैनात अतिरिक्त पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को जबरन सदन से बाहर खदेड़ा। इसके बाद भी कार्यकर्ता काफी देर तक बचत भवन के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे।

इस घटना पर मेयर सुरेंद्र चौहान ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि हाऊस के अंदर इस तरह की गुंडागर्दी और तानाशाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेयर ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सीटू कार्यकर्ताओं को निगम सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए था। नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस लेने की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसका पालन करना अनिवार्य है, दबाव से कुछ नहीं होगा। सदन की कार्यवाही बाधित करने वालों के खिलाफ पुलिस को सख्त कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में सैहब कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए एस्मा लागू कर दिया था। इसके तहत हड़ताल करने वाले 41 कर्मचारियों को नौकरी से टर्मिनेट (बर्खास्त) कर दिया गया था। अब यूनियन इन्हीं कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर अड़ी हुई है।