Edited By Kuldeep, Updated: 27 Jun, 2026 09:44 PM

वित्तीय संकट से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन-टाइम सैटलमैंट (ओटीएस) नीति के तहत कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना लागू करने का निर्णय लिया है।
शिमला (ब्यूरो): वित्तीय संकट से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन-टाइम सैटलमैंट (ओटीएस) नीति के तहत कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना लागू करने का निर्णय लिया है। बजट घोषणा के अनुरूप शुरू की गई इस योजना के तहत राज्य सरकार प्रति किसान तीन लाख रुपए तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत वहन करेगी। योजना से राज्य के लगभग 6,356 किसानों को लाभ मिलने की संभावना है, जिसके लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जिनकी कृषि भूमि ऋण अदायगी नहीं होने के कारण नीलामी की कगार पर पहुंच गई है।
सरकार के इस फैसले से किसानों के लिए ऋण का नियमितीकरण आसान होगा और उनकी आर्थिक परेशानियां कम होंगी। योजना का क्रियान्वयन हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक तथा कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के माध्यम से किया जाएगा। संबंधित बैंक शाखाएं पात्र किसानों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करेंगी, ताकि उन्हें समय पर ब्याज अनुदान का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे किसानों को राहत देने के उद्देश्य से यह एकमुश्त सहायता योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और वित्तीय संस्थानों को योजना का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए ऐतिहासिक समर्थन मूल्य भी दे रही है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करते हुए प्रदेश में कृषि क्षेत्र को अधिक समृद्ध और टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।