Shimla: सह-मालिक को सांझी जमीन पर निर्माण करने से नहीं रोका जा सकता : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 01 Jul, 2026 09:23 PM

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हाईकोर्ट ने भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि किसी भी सह-मालिक को सांझी जमीन या 'आबादी देह' पर निर्माण करने से केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि वह एक सह-मालिक है।

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि किसी भी सह-मालिक को सांझी जमीन या 'आबादी देह' पर निर्माण करने से केवल इसलिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि वह एक सह-मालिक है। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि इस निर्माण से दूसरे हिस्सेदार को पूरी तरह बेदखल किया जा रहा है या जमीन की उपयोगिता कम हो रही है, तब तक रोक लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है। यह फैसला न्यायाधीश राकेश कैंथला की एकल पीठ ने निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखते हुए सुनाया।

मामले के अनुसार कांगड़ा जिले के देहरा में मूल वादी ने साल 1995 में एक सिविल सूट दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादी ने 'आबादी देह' के रूप में दर्ज सांझी जमीन पर साल 1992 में जबरन दुकानों और मकानों का निर्माण कर लिया था। वादी ने इस निर्माण को गिराने और जमीन को पुरानी स्थिति में बहाल करने के लिए कोर्ट से आदेश की मांग की थी।

प्रतिवादी का कहना था कि उसने 1 जुलाई 1991 को एक सेल डीड के जरिए इस जमीन का हिस्सा पुरुषोत्तम नामक व्यक्ति से खरीदा था। इस नाते वह जमीन का सह-मालिक बन चुका था और उसे अपनी सीमा में निर्माण करने का पूरा अधिकार था। मामले की सुनवाई के बाद देहरा की ट्रायल कोर्ट और धर्मशाला की अपीलीय अदालत, दोनों ने ही वादी का दावा खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

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