मनी लॉन्ड्रिंग मामला : ड्रग्स विभाग के पूर्व अधिकारी निशांत सरीन को हाईकोर्ट से मिली जमानत

Edited By Kuldeep, Updated: 09 Jul, 2026 09:59 PM

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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में घिरे राज्य ड्रग्स विभाग के पूर्व अधिकारी निशांत सरीन की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली है।

शिमला (मनोहर): हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में घिरे राज्य ड्रग्स विभाग के पूर्व अधिकारी निशांत सरीन की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की एकल पीठ ने करीब 10 महीने की न्यायिक हिरासत और मुख्य मामलों की धीमी कानूनी प्रक्रिया को आधार बनाते हुए आरोपी को सशर्त रिहाई के आदेश दिए हैं। यह मामला सरीन के ड्रग्स इंस्पैक्टर और सहायक ड्रग्स कंट्रोलर के पद पर रहने के दौरान का है। विजीलैंस विभाग ने साल 2019 में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर फार्मा कंपनियों को डराया और होटल बुकिंग, हवाई टिकट व नकदी के रूप में करीब 43 लाख रुपए का अवैध लाभ उठाया।

इसी भ्रष्टाचार के मामले को आधार बनाकर ईडी ने 31 मार्च, 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था। जांच के दौरान ईडी ने छापेमारी कर सरीन और उनके करीबियों के बैंक खाते, गाड़ियां और लाखों का सोना फ्रीज/सीज किया। उसके बाद 9 अक्तूबर, 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी ने फार्मा कंपनियों से जबरन वसूली कर करोड़ों रुपए की अपराध की कमाई की। वह बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं और बाहर आकर गवाहों या सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालत ने माना कि विजीलैंस के एक मामले की जांच अभी भी चल रही है और दूसरे में आरोप तय नहीं हुए हैं, जिससे निकट भविष्य में इस मुकद्दमे के पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं दिखती। हाईकोर्ट ने निशांत सरीन को 2 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की 2 गारंटियों पर रिहा करने का आदेश दिया है।

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