Edited By Vijay, Updated: 24 Jul, 2026 03:49 PM

प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले की पोवारी ग्राम पंचायत के उस विवादास्पद फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें सालाना होने वाली किन्नर कैलाश यात्रा पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था। न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रिवाल दुआ ने मामले की सुनवाई के पश्चात...
शिमला (मनोहर): प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले की पोवारी ग्राम पंचायत के उस विवादास्पद फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें सालाना होने वाली किन्नर कैलाश यात्रा पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था। न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रिवाल दुआ ने मामले की सुनवाई के पश्चात स्पष्ट किया कि एक ग्राम पंचायत के पास सदियों से चली आ रही इस धार्मिक यात्रा को रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। पोवारी ग्राम पंचायत ने 13 जुलाई 2026 को एक प्रस्ताव पारित किया था। ग्राम सभा की विशेष बैठक में मौजूद 112 लोगों ने यात्रा का विरोध किया था, जबकि 62 लोग इसके समर्थन में थे।
बहुमत के आधार पर पंचायत ने यात्रा को हमेशा के लिए रोकने का फरमान सुना दिया। पंचायत ने यात्रा के आयोजन से जुड़ी पंजीकृत संस्था 'श्री प्रकाशंकरा किन्नर कैलाश यात्रा सोसायटी' को भी अवैध रूप से भंग करने का आदेश दे दिया था। मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यात्रा का आयोजन राज्य सरकार और प्रशासन की उच्च स्तरीय समिति द्वारा तय प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि ग्राम पंचायत के पास पंजीकृत सहकारी समितियों को भंग करने या देश भर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस प्राचीन यात्रा को रोकने की कोई कानूनी क्षमता नहीं है।
अदालत ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए यात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए। पोवारी ग्राम पंचायत को यात्रा में किसी भी तरह की बाधा या हस्तक्षेप न करने के लिए कड़ाई से पाबंद किया गया है। यह यात्रा हर साल की तरह इस बार भी 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और तय शैड्यूल के अनुसार 30 जुलाई 2026 तक जारी रहेगी। कोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है और अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को तय की है।
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