Edited By Kuldeep, Updated: 31 Aug, 2026 05:12 PM

हिमाचल में इन दिनों मनुष्य और मवेशी दोनों ही संक्रामक बीमारियों के दोहरे खतरे से जूझ रहे हैं।
शिमला (संतोष कुमार): हिमाचल में इन दिनों मनुष्य और मवेशी दोनों ही संक्रामक बीमारियों के दोहरे खतरे से जूझ रहे हैं। एक ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप तेजी से पांव पसार रहा है, दूसरी ओर स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है।
स्वाइन फ्लू (एच1एन1) से 2 की मौत, 10 मरीज पॉजिटिव
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। स्वाइन फ्लू से राज्य में अब तक 2 मरीजों की मौत दर्ज की जा चुकी है। हाल ही में आईजीएमसी शिमला में बिलासपुर निवासी 64 वर्षीय व्यक्ति ने दम तोड़ा, जबकि इससे पहले सुंदरनगर के एक मरीज की चंडीगढ़ में मौत हुई थी। प्रदेश भर में स्वाइन फ्लू के अब तक कुल 10 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से मरीज आईजीएमसी शिमला, टांडा मैडीकल कॉलेज और मंडी में उपचाराधीन हैं।
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय
मास्क का प्रयोग: भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनें और खांसते या छींकते समय मुंह व नाक को रुमाल या कोहनी से ढकें।
हाथों की स्वच्छता: समय-समय पर हाथों को साबुन और पानी से धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
संक्रमितों से दूरी: बुखार, खांसी या जुकाम के लक्षण वाले व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचें।
तत्काल डाक्टरी सलाह: तेज बुखार, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ होने पर बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में जांच करवाएं।
लंपी वायरस, मवेशियों में फैला संक्रमण
पशुपालन विभाग के अनुसार हिमाचल के सोलन और हमीरपुर सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में लंपी वायरस के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में इस वर्ष लंपी वायरस के 80 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 7 मवेशियों की मौत हुई है। हमीरपुर में 48 केस व 4 मौतें, जबकि सोलन में 30 केस व 3 मौतें हो चुकी हैं। पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और हजारों की संख्या में मुफ्त वैक्सीन खुराकें वितरित कर टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है।
लंपी वायरस से मवेशियों के बचाव के उपाय
संक्रमित पशुओं को अलग रखें: शरीर पर गांठें, तेज बुखार या कमजोरी दिखने पर बीमार मवेशी को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग आइसोलेट करें।
टीकाकरण करवाएं: पशुपालन विभाग की मदद से अपने मवेशियों को समय पर लंपी-रोधी टीका लगवाएं।
गऊशाला में स्वच्छता: यह बीमारी मुख्य रूप से मक्खी-मच्छरों से फैलती है, इसलिए गऊशाला की सफाई रखें और मच्छर-मक्खी भगाने के लिए कीटनाशक या नीम के धुएं का उपयोग करें।
दूध का उबालकर प्रयोग: संक्रमित मवेशी के दूध का सेवन हमेशा अच्छी तरह उबालकर ही करें।
आवाजाही पर रोक: प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं की खरीद-बिक्री व अंतर-जिला आवाजाही पर रोक रखें।
स्वाइन फ्लू और लंपी वायरस के लिए बचाव ही है असली उपाय : डा. रॉकी
स्वाइन फ्लू और लंपी वायरस के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों ने अलर्ट जारी किया है। डाक्टरों की साफ राय है कि अफवाहों से बचें, पैनिक न करें, बल्कि सही समय पर इलाज और सतर्कता से इन दोनों बीमारियों को मात दें। डीडीयू जोनल अस्पताल शिमला के गोल्ड मैडलिस्ट डा. लोकेंद्र शर्मा रॉकी ने कहा कि स्वाइन फ्लू एक श्वसन संक्रमण है जो इंसानों में तेजी से फैलता है। इससे बचने के लिए भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें, साफ-सफाई रखें और बार-बार हाथ धोएं। लंपी स्किन डिजीज केवल गौवंशीय पशुओं की बीमारी है और यह इंसानों में बिल्कुल नहीं फैलती। पशुपालकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग बांधें, साफ-सफाई रखें और स्वस्थ पशुओं का जल्द से जल्द टीकाकरण करवाएं।