Edited By Kuldeep, Updated: 17 Jul, 2026 12:31 PM

एचआरटीसी में इलैक्ट्रिक बसों के रखरखाव को निजी हाथों यानी निजी कंपनियों को देने की तैयारी है। इस तैयारी की निगम कर्मचारी संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई है।
शिमला (राजेश): एचआरटीसी में इलैक्ट्रिक बसों के रखरखाव को निजी हाथों यानी निजी कंपनियों को देने की तैयारी है। इस तैयारी की निगम कर्मचारी संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई है। हिमाचल परिवहन मजदूर संघ पदाधिकारियों का कहना है कि एचआरटीसी में शामिल की जा रहीं नई इलैक्ट्रिक बसों के रखरखाव और तकनीकी सेवाओं के लिए निजी कंपनी के माध्यम से भर्ती की जा रही है। संघ ने इसे निगम के संभावित निजीकरण की दिशा में उठाया जा रहा कदम बताते हुए सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संघ के प्रदेश महामंत्री हरीश कुमार पराशर ने कहा कि निगम की विभिन्न कार्यशालाओं और कर्मशालाओं में वर्षों से तकनीकी कर्मचारियों के कई पद खाली पड़े हैं।
ऐसे में निगम के पास प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारी होने के बावजूद तकनीकी कार्य निजी कंपनियों को सौंपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में एचआरटीसी की अन्य सेवाओं के भी आऊटसोर्स होने का रास्ता खुल सकता है, जिससे निगम की स्वायत्तता और मजबूती प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इलैक्ट्रिक बसों के संचालन और रखरखाव के लिए आवश्यक तकनीकी पद एचआरटीसी के भीतर सृजित कर नियमित भर्ती की जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिल सकें और निगम की तकनीकी क्षमता भी मजबूत हो।
कर्मशालाओं में भरे जाएं रिक्त तकनीकी कर्मियों के पद
संगठन ने निगम की सभी कार्यशालाओं और कर्मशालाओं में रिक्त तकनीकी पदों को जल्द भरे जाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त इलैक्ट्रिक बसों के लिए तकनीकी स्टाफ की भर्ती सीधे निगम के माध्यम से की जाए। आऊटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बढ़ावा देने के बजाय निगम के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन को मजबूत किया जाए। प्रदेश के युवाओं को नियमित और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करवाया जाए। उन्होंने कहा कि निगम केवल एक परिवहन निगम नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की जीवनरेखा है। इसलिए सरकार को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो निगम को मजबूत करें, न कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में निजीकरण की आशंकाओं को बढ़ावा दें।