Shimla: पति या पिता जो पूरी तरह स्वस्थ हैं, पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता : हाईकोर्ट

Edited By Kuldeep, Updated: 10 Sep, 2026 08:37 PM

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हाईकोर्ट ने पारिवारिक मुकद्दमों में भरण-पोषण को लेकर स्पष्ट किया है कि एक पति या पिता, जो भले ही वर्तमान में कुछ न कमा रहा हो, लेकिन यदि वह शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो अपनी पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी और भरण-पोषण करने के कर्तव्य...

शिमला (मनोहर): हाईकोर्ट ने पारिवारिक मुकद्दमों में भरण-पोषण को लेकर स्पष्ट किया है कि एक पति या पिता, जो भले ही वर्तमान में कुछ न कमा रहा हो, लेकिन यदि वह शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो अपनी पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी और भरण-पोषण करने के कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्त्ता (पति) द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। पीड़ित पत्नी और उनके नाबालिग बेटे ने सरकाघाट की फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए अर्जी दाखिल की थी।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पत्नी को 2,500 रुपए प्रति माह और बढ़ते बच्चे के लिए 3,500 रुपए प्रति माह (कुल 6,000 रुपए महीना) गुजारा भत्ता देने का आदेश सुनाया। पति ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उसकी कुल मासिक आय महज 6,100 रुपए है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी न्यायिक आदेश को चुनौती दी जाती है, तो उसकी वैधता निचली अदालत के सामने मौजूद सामग्री के आधार पर ही परखी जाती है। कोर्ट ने माना कि आज के समय में पत्नी के लिए 2,500 रुपए और बढ़ते बच्चे के लिए 3,500 रुपए की राशि बिल्कुल भी अत्यधिक नहीं है कि इसमें कोई दखल दिया जाए।

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