Shimla: गऊशालाओं की बजाय अब किसानों को सीधे मिलेगा पैसा, पोर्टल पर आएगा पशुओं का पूरा रिकॉर्ड

Edited By Kuldeep, Updated: 26 Sep, 2026 05:03 PM

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हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा और अनुपयोगी मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए सरकार अब गऊशालाओं के मौजूदा मॉडल में बदलाव करने की तैयारी में है।

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा और अनुपयोगी मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए सरकार अब गऊशालाओं के मौजूदा मॉडल में बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार ब्लाॅक स्तर पर स्क्रैप कैटल यानी ऐसे पशुओं का अलग से डेटा तैयार करेगी, जो दूध देने या प्रजनन में सक्षम नहीं हैं। इसी डेटा के आधार पर किसानों को पशुओं को रखने के लिए आर्थिक सहायता देने की योजना तैयार की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि गऊशालाओं को पैसा देने की बजाय सीधे उन किसानों को राशि दी जाए, जो अनुपयोगी पशुओं को अपने स्तर पर रखने के लिए तैयार होंगे। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर स्क्रैप कैटल का डाटा तैयार किया जाएगा और बाद में इसे स्ट्रे कैटल पॉलिसी में शामिल किया जाएगा। सरकार की ओर से पंचायत स्तर पर यह जानकारी जुटाई जाएगी कि प्रत्येक पंचायत में कितने पालतू मवेशी हैं और कितने पशु बेसहारा या स्क्रैप कैटल की श्रेणी में आते हैं।

सड़कों पर घूम रहे पशुओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। पालतू और बेसहारा पशुओं का रिकॉर्ड तैयार होने के बाद इसे पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे सरकार के पास पंचायतवार और जिला वार कंसोलिडेटेड डेटा उपलब्ध होगा। पोर्टल के माध्यम से यह भी पता चल सकेगा कि किस किसान के पास कितने पालतू मवेशी हैं और कितने स्क्रैप कैटल हैं। डिजिटल रिकॉर्ड बनने से योजना की निगरानी आसान होगी। पंचायत स्तर पर संबंधित फार्मासिस्ट भी पशुओं की स्थिति की निगरानी कर सकेगा। इसमें यह जानकारी भी दर्ज की जा सकेगी कि किसी पंचायत में कितने पशुओं की मौत हुई और कितने पशु बाकी हैं।

गऊशालाओं को मिल रहे 70 करोड़
वर्तमान में सरकार सरकारी और निजी गऊशालाओं के लिए करीब 70 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। गऊशालाओं में प्रति पशु 1200 रुपए की सहायता दी जा रही है। हालांकि सरकार के स्तर पर यह बात सामने आई है कि कई जगह पशुओं को समय पर चारा, पानी और घास उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे उनकी स्थिति प्रभावित होती है। इसी कारण अब सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है, जिसमें पशुओं की जिम्मेदारी सीधे किसानों को देकर उन्हें निर्धारित आर्थिक सहायता दी जाए। स्क्रैप कैटल का सही आंकड़ा सामने आने के बाद उसी के आधार पर बजट तय किया जाएगा।

राज्य में किया जाएगा फुलप्रूफ सिस्टम तैयार : प्रो. चंद्र कुमार
कृषि एवं पशु पालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसा फुलप्रूफ सिस्टम तैयार करना है, जिससे सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या कम हो और उनकी जिम्मेदारी तय हो सके। योजना के तहत धीरे-धीरे गऊशालाओं में मौजूद अनुपयोगी पशुओं को किसानों तक पहुंचाने और उन्हें आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेसहारा पषुओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहयोग नहीं मिल रहा है और प्रस्तावित राशि राज्य सरकार अपने स्तर पर उपलब्ध करवा रही है।

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